Back To School: स्कूल खुलने से पहले बच्चों की स्क्रीन की लत कैसे छुड़ाएं? जानिए एक्सपर्ट के आसान और असरदार टिप्स

लंबी छुट्टियों के बाद बच्चों को स्कूल की दिनचर्या में वापस लाने के लिए स्क्रीन टाइम धीरे-धीरे कम करें, नींद का समय सुधारें और डांटने के बजाय धैर्य व सकारात्मक गतिविधियों का सहारा लें। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना भी फायदेमंद हो सकता है।

Back To School: बच्चों की गर्मियों की लंबी छुट्टियां खत्म होते ही घरों में एक नई चुनौती शुरू हो जाती है। देर रात तक जागना, सुबह देर से उठना, घंटों मोबाइल, टीवी और टैबलेट पर समय बिताना और फिर अचानक स्कूल की अनुशासित दिनचर्या में लौटना बच्चों के साथ-साथ माता-पिता के लिए भी आसान नहीं होता। ऐसे में बच्चों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और स्कूल जाने की चिंता (Back to School Anxiety) बढ़ना सामान्य बात है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव को डांट या सजा के बजाय धैर्य और सही रणनीति से आसान बनाया जा सकता है।

स्क्रीन टाइम कम करने के लिए रखें धैर्य

स्कूल साइकोलॉजिस्ट गीतिका कपूर के अनुसार, छुट्टियों में बढ़ा स्क्रीन टाइम बच्चों को वास्तविक दुनिया से दूर कर देता है। जब अचानक मोबाइल या टीवी का समय कम किया जाता है तो बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं। ऐसे में माता-पिता को शांत रहकर बच्चों को समझाना चाहिए कि यह बदलाव उनकी सेहत और बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है। लगातार डांटने या सजा देने से स्थिति और बिगड़ सकती है।

नखरे नहीं, तनाव का संकेत भी हो सकते हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार बच्चों का गुस्सा या जिद सिर्फ नखरा नहीं बल्कि अंदर छिपी चिंता का संकेत होता है। नई क्लास, नए शिक्षक या दोस्तों से मिलने की घबराहट भी बच्चों के व्यवहार में बदलाव ला सकती है। इसलिए बच्चों की बात ध्यान से सुनें और उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें।

स्कूल की तैयारी धीरे-धीरे करें

अगर बच्चा स्कूल जाने को लेकर ज्यादा तनाव महसूस कर रहा है तो शुरुआत धीरे-धीरे करें। शुरुआती दिनों में माता-पिता खुद बच्चे को स्कूल छोड़ने और लेने जाएं। जरूरत पड़ने पर स्कूल प्रशासन से बात कर शुरुआती दिनों में आधे समय के लिए स्कूल भेजने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।

स्क्रीन के बजाय अपनाएं ये विकल्प

स्कूल के बाद बच्चों को मोबाइल देने के बजाय बोर्ड गेम्स, पेंटिंग, क्ले मॉडलिंग, गार्डनिंग, बेकिंग, ड्रॉइंग या आउटडोर एक्टिविटीज में व्यस्त रखें। परिवार के साथ समय बिताना, बातचीत करना और बच्चों को गले लगाना भी उनके मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है।

ऐसे सुधारें बच्चों की नींद

स्कूल खुलने से कम से कम 10 से 15 दिन पहले बच्चों का सोने और उठने का समय धीरे-धीरे बदलना शुरू करें। हर दो-तीन दिन में सोने का समय 15-20 मिनट पहले करें ताकि शरीर नए रूटीन के अनुसार खुद को ढाल सके। साथ ही रोजाना कुछ समय पढ़ाई या दिमागी गतिविधियों के लिए भी तय करें, ताकि स्कूल का दबाव अचानक महसूस न हो।

कब लें विशेषज्ञ की मदद?

अगर स्कूल शुरू होने के दो सप्ताह बाद भी बच्चा लगातार चिड़चिड़ा रहे, स्कूल जाने से डरता हो, जरूरत से ज्यादा रोता हो या व्यवहार में सुधार न दिखे, तो चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट या स्कूल काउंसलर से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

Exit mobile version