New Born Care: नवजात के जन्म के बाद उसे नए वातावरण में ढलने में समय लगता है। ऐसे में कंगारू केयर बच्चे की देखभाल का एक सरल तरीका है। इसमें नवजात को माता या पिता की खुली छाती पर सीधे स्किन-टू-स्किन कॉन्टेक्ट के लिए रखा जाता है।
यह खास तौर पर समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, स्वस्थ नवजात को भी सुरक्षित तरीके से इसका लाभ मिल सकता है।
बच्चे के लिए क्यों फायदेमंद है?
स्किन-टू-स्किन संपर्क का बच्चे पर शांत करने वाला प्रभाव पड़ सकता है। इससे बच्चे के हार्ट रेट, सांस और शरीर के तापमान को स्थिर रखने में मदद मिलती है। साथ ही, माता-पिता के शरीर का संपर्क बच्चे को सुरक्षा और आराम का एहसास दे सकता है।
कंगारू केयर बच्चे के भावनात्मक और न्यूरोलॉजिकल विकास के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है। नियमित संपर्क से माता-पिता और नवजात के बीच बॉन्डिंग मजबूत हो सकती है।
स्तनपान में भी मिल सकती है मदद
कंगारू केयर स्तनपान कराने वाली मां के लिए भी उपयोगी हो सकती है। बच्चे को मां की छाती के करीब रखने से स्तनपान शुरू करने और सही तरीके से लैच करने में मदद मिल सकती है। इससे दूध बनने की प्रक्रिया को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
कौन दे सकता है कंगारू केयर?
कंगारू केयर केवल मां तक सीमित नहीं है। पिता या अन्य करीबी देखभाल करने वाला व्यक्ति भी बच्चे को स्किन-टू-स्किन संपर्क दे सकता है। इससे मां को आराम और प्रसव के बाद रिकवरी के लिए समय मिल सकता है।
कितनी देर और कितनी बार करें?
नवजात की स्थिति के अनुसार कंगारू केयर की अवधि तय की जानी चाहिए। रोजाना कुछ समय के लिए सुरक्षित तरीके से बच्चे को सीने से लगाने से उसे आराम और भावनात्मक सुरक्षा मिल सकती है। समय से पहले जन्मे या अस्पताल में भर्ती बच्चे के मामले में डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसे करना बेहतर है।
