लखनऊ यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई पूरी करने के करीब 40 साल बाद जस्टिस विक्रम नाथ देश के अगले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी CJI का पद संभालने जा रहे हैं। उनके CJI बनने की खबर के साथ ही विश्वविद्यालय के लॉ डिपार्टमेंट और शिया पीजी कॉलेज से जुड़ी उनकी छात्र जीवन की यादें भी चर्चा में हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ को लखनऊ यूनिवर्सिटी की ओर से 2018 में विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। कानून की पढ़ाई से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक उनका न्यायिक सफर लंबा रहा है।
1986 में कानून पढ़ा
जस्टिस विक्रम नाथ ने 1986 में लखनऊ यूनिवर्सिटी के शिया पीजी कॉलेज से लॉ में ग्रेजुएशन किया था। इसके अगले साल उन्होंने वकील के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराया।
इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में 17 साल से ज्यादा समय तक वकालत की। वर्ष 2004 में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया। 2006 में वह स्थायी जज बने।
इसके बाद उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की जिम्मेदारी संभाली। अगस्त 2021 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त किया गया।
कॉलेज लौटे थे जस्टिस
15 अप्रैल 2022 को जस्टिस विक्रम नाथ शिया पीजी कॉलेज पहुंचे थे। वह कॉलेज की हजरत इमाम मोहम्मद तकी बिल्डिंग का उद्घाटन करने आए थे।
इस दौरान उन्होंने मंच से अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा किए थे। उन्होंने शिया कॉलेज को अपनी सफलता में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला संस्थान बताया था।
अपने संबोधन में उन्होंने कॉलेज से जुड़े अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा था कि अगर शिया कॉलेज नहीं होता तो वह कुछ नहीं होते।
गुजरात में शुरू हुई स्ट्रीमिंग
जस्टिस विक्रम नाथ के न्यायिक करियर में इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबा कार्यकाल, गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस का पद और फिर सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी शामिल रही।
गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहते हुए कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की जानकारी के अनुसार, इसे देश के किसी हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की ओर से की गई इस तरह की पहली पहल बताया गया था।
पत्नी भी बड़ी जिम्मेदारी में
जस्टिस विक्रम नाथ की पत्नी प्रो. संगीता श्रीवास्तव इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर हैं। उन्हें हाल ही में दोबारा विश्वविद्यालय का वाइस चांसलर नियुक्त किया गया है।
इस तरह न्यायिक और अकादमिक क्षेत्र में दोनों की अलग-अलग जिम्मेदारियां रही हैं। जस्टिस विक्रम नाथ का नाम अब देश के सर्वोच्च न्यायिक पद से जुड़ने के कारण चर्चा में है।
लॉ डिपार्टमेंट की विरासत
जस्टिस विक्रम नाथ के अगले CJI बनने के साथ लखनऊ यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट की पुरानी उपलब्धियों की भी चर्चा हो रही है। शिया पीजी कॉलेज के प्रवक्ता प्रदीप शर्मा के मुताबिक, जस्टिस विक्रम नाथ सुप्रीम कोर्ट के जज रहते हुए कॉलेज आए थे और उन्होंने अपने छात्र जीवन को याद किया था।
पूर्व डीन और विभागाध्यक्ष रहे रिटायर्ड प्रोफेसर एके अवस्थी के अनुसार, लखनऊ यूनिवर्सिटी का लॉ डिपार्टमेंट देश के पुराने लॉ डिपार्टमेंट्स में शामिल है। यहां से पढ़े कई विद्यार्थी देशभर में महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे हैं।
नेपाली संविधान से जुड़ा नाम
लखनऊ यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट से जुड़े प्रोफेसर आरयू सिंह का नाम भी इसकी विरासत में प्रमुखता से लिया जाता है। वह 1956 तक विभाग के डीन रहे और टीचिंग तथा रिसर्च को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने में उनकी भूमिका बताई जाती है।
बाद में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी और बीएचयू में लॉ फैकल्टी को विकसित करने में भी मदद की। बताया जाता है कि प्रोफेसर आरयू सिंह ने नेपाल के संविधान का ड्राफ्ट भी तैयार किया था।







