Lucknow Animal Cruelty Case:लखनऊ के महानगर थाना क्षेत्र स्थित शालीमार गैलेंट परिसर में पशु क्रूरता का मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां कुछ बिल्लियों को बोरों में बंद करके रखा गया था, जबकि एक लंगूर को रस्सी से खंभे से बांधकर रखा गया था। सूचना मिलने के बाद पशु संरक्षण संस्था ‘आसरा- द हेल्पिंग हैंड्स ट्रस्ट’ की टीम ने मौके पर पहुंचकर जानवरों को रेस्क्यू कराया।
बोरों में बंद मिलीं बिल्लियां
संस्था की ओर से महानगर थाने में दी गई शिकायत के मुताबिक, परिसर में बिल्लियों को बोरों में भरकर बाहर फेंकने की तैयारी की जा रही थी। सूचना मिलने पर संस्था की संचालक चारु खरे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। टीम ने वन विभाग और डायल-112 पुलिस की मदद से बोरों में बंद बिल्लियों को बाहर निकाला।
शिकायत में कहा गया है कि बिल्लियों की हालत देखकर उन्हें काफी देर से बंद रखे जाने की आशंका थी। संस्था ने मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
लंगूर को खंभे से बांधा
रेस्क्यू के दौरान परिसर में एक लंगूर भी मिला, जिसे रस्सी से बांधकर रखा गया था। संस्था के मुताबिक, लंगूर को शाहरुख नाम के व्यक्ति ने बंधक बनाकर रखा था। संस्था ने इसे वन्यजीव को अवैध रूप से कैद में रखने का मामला बताया है।
लंगूर को भी बंधन से मुक्त कराकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। संस्था का कहना है कि मामला केवल पशु क्रूरता तक सीमित नहीं है, बल्कि वन्यजीव को कैद में रखने से जुड़े कानूनों की भी जांच होनी चाहिए।
सोसाइटी प्रबंधन पर सवाल
आसरा ट्रस्ट ने शिकायत में शालीमार गैलेंट के प्रेसिडेंट विकास टंडन और सेक्रेटरी सुमित गुप्ता की भूमिका की भी जांच की मांग की है। संस्था ने सवाल उठाया कि इतने बड़े रिहायशी परिसर में लंगूर को किसकी जानकारी या अनुमति से रखा गया था।
संस्था ने यह भी जानना चाहा है कि परिसर में जानवरों के साथ कथित क्रूरता की जानकारी प्रबंधन को थी या नहीं।
सीसीटीवी फुटेज मांगी
संस्था ने पुलिस से परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित कराने और जब्त करने की मांग की है। उसका कहना है कि फुटेज से यह पता चल सकता है कि बिल्लियों को किसने बोरों में बंद किया और लंगूर को किस तरह वहां लाया गया।
तहरीर में शाहरुख समेत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण कानून और वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। फिलहाल शिकायत के आधार पर मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पुलिस स्तर पर होनी है।









