Lucknow Fake Call Center: लखनऊ में चल रहे कई फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर पर छापा, इतने लोगों की हुई गिरफ़्तारी

लखनऊ के विभूति खंड स्थित समिट बिल्डिंग में संचालित एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर पर पुलिस ने छापा मारकर 119 लोगों को हिरासत में लिया है। आरोप है कि आरोपी ऑनलाइन रिफंड और तकनीकी सहायता के नाम पर देश-विदेश के लोगों से साइबर ठगी करते थे। पुलिस ने बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए हैं।

Lucknow Fake Call Center: लखनऊ पुलिस ने राजधानी के विभूति खंड इलाके में संचालित एक कथित फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। संयुक्त कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 119 लोगों को हिरासत में लिया, जबकि मौके से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार यह कॉल सेंटर समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल से संचालित हो रहा था और यहां से देश-विदेश के लोगों को ऑनलाइन रिफंड और अन्य बहानों से निशाना बनाया जाता था।

रिफंड और तकनीकी सहायता के नाम पर ठगी का आरोप

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर रिफंड दिलाने और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के नाम पर लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद विभिन्न तरीकों से उन्हें झांसे में लेकर साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था।

पुलिस का कहना है कि कॉल सेंटर मुख्य रूप से रात के समय संचालित होता था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क के लिए कथित तौर पर विशेष इंटरनेट-आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था।

100 लैपटॉप और 178 मोबाइल बरामद

साइबर प्रकोष्ठ और साइबर थाने की संयुक्त टीम ने छापेमारी के दौरान मौके से:

बरामद किए हैं।

जांच में यह भी पता चला है कि कॉल सेंटर “सोलारिस सॉल्यूशन” नाम से संचालित किया जा रहा था।

अहमदाबाद के दो संचालक हिरासत में

पुलिस ने मामले में अहमदाबाद निवासी ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। दोनों पर कॉल सेंटर के संचालन और गतिविधियों में अहम भूमिका निभाने का आरोप है।

फोरेंसिक जांच से खुलेंगे नेटवर्क के राज

पुलिस ने जब्त किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल साक्ष्यों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क के जरिए किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया, ठगी की रकम कहां भेजी गई और इस अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।

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