High Court Strict:अतिक्रमण और हंगामे पर अदालत नाराज, हाईकोर्ट की सख्ती पर वकीलों में दहशत

लखनऊ में सिविल कोर्ट परिसर के अतिक्रमण विवाद पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। अदालत ने अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी और कहा कि अतिक्रमण से एंबुलेंस तक फंस रही थीं, जिससे एक मरीज की मौत हुई थी।

High Court Strictness Creates Stir Among Lawyers: लखनऊ में सिविल कोर्ट परिसर के आसपास हुए अतिक्रमण हटाने और उसके बाद पैदा हुए विवाद पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि मामले में सामने आए तथ्यों को देखते हुए आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने पर विचार किया जाएगा। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और राजीव भारती की खंडपीठ ने की। अदालत अनुराधा सिंह और अन्य लोगों की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

डेढ़ घंटे तक चली सुनवाई

इस मामले की सुनवाई दोपहर 3:45 बजे शुरू हुई और करीब डेढ़ घंटे तक चली। सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में बड़ी संख्या में वकील मौजूद रहे। शुरुआत में ही अदालत ने सिविल कोर्ट के अधिवक्ताओं की ओर से पेश वकीलों से कई सवाल पूछे। अदालत ने पूछा कि वकीलों के बीच लाठियां क्यों बांटी गईं और न्यायिक कामकाज में रुकावट क्यों पैदा हुई।

दूसरी तरफ वकीलों ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि बिना सही तरीके से निशान लगाए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। वकीलों ने यह भी कहा कि एक फोटोकॉपी की दुकान भी तोड़ दी गई, जबकि उसका किराया जिला न्यायालय को जाता था।

अदालत ने दी सफाई

इस पर अदालत ने कहा कि उसे इस मामले की पूरी जानकारी है। कोर्ट ने बताया कि फोटोकॉपी की दुकान गलती से क्षतिग्रस्त हुई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित दुकानदार को उसी जगह दूसरी दुकान दे दी गई है और नुकसान की भरपाई करने की कोशिश भी की जा रही है।

अदालत ने दोबारा कहा कि सिविल कोर्ट परिसर के आसपास लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या बनी हुई थी। इसके कारण आम लोगों के साथ-साथ जरूरी सेवाओं को भी परेशानी हो रही थी।

एंबुलेंस फंसने से हुई थी मरीज की मौत

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक गंभीर घटना का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण की वजह से कई बार एंबुलेंस तक रास्ते में फंस जाती थीं। ऐसी ही एक घटना में एक मरीज की जान भी चली गई थी। अदालत ने माना कि इस तरह की स्थिति बेहद चिंताजनक है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

वकीलों के चैंबर के लिए नई तैयारी

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी बताया कि कैसरबाग स्थित पुरानी तहसील की जमीन वकीलों के चैंबर बनाने के लिए देने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। इस बारे में बार एसोसिएशनों को भी जानकारी दे दी गई है। अदालत ने कहा कि मामले में विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा।

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