Mahakumbh 2025: महाकुंभ के आध्यात्म में डूबी नई पीढ़ी, रील्स लाइफ से रियल लाइफ की ओर बढ़ते क़दम

महाकुंभ 2025 में युवाओं की भागीदारी बढ़ी, 50% से ज्यादा 30 साल से कम उम्र के थे। सनातन संस्कृति और आध्यात्म में रुचि बढ़ी, गूगल पर सर्च कर रहे हैं। यह महाकुंभ भारत की एकता और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक बना।

Mahakumbh 2025: महाकुंभ 2025 अब अपने अंतिम चरण में है। बसंत पंचमी के अमृत स्नान के बाद अखाड़ों की रवानगी की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस बीच, सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस महाकुंभ की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही श्री शंभू पंच अग्नि अखाड़ा के महामंडलेश्वर संपूर्णानंद महाराज ने इसका जवाब दिया और बताया कि इस बार महाकुंभ में युवाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा रही।

युवाओं में बढ़ती आस्था, 50% से ज्यादा युवा हुए शामिल

संपूर्णानंद महाराज ने कहा कि इस महाकुंभ में 50 प्रतिशत से ज्यादा लोग 30 साल से कम उम्र के थे, जो पहले कभी देखने को नहीं मिला। ये दिखाता है कि सनातन संस्कृति के प्रति युवाओं की रुचि तेजी से बढ़ रही है। इसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है, जिन्होंने सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए बहुत काम किया है।

सनातन और आध्यात्म को सर्च कर रहे युवा

इस बार बड़ी संख्या में युवा अकेले या परिवार के साथ महाकुंभ पहुंचे। संपूर्णानंद महाराज के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में भारत में जो सांस्कृतिक जागरण हुआ है, उसने युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया है। युवा अब महाकुंभ में सत्संग, राम कथा, भागवत कथा और कीर्तन का हिस्सा बन रहे हैं।

एकता और आध्यात्म का संगम

महाकुंभ में हर जाति, हर धर्म और हर वर्ग के लोग गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में बिना किसी भेदभाव के एक साथ डुबकी लगा रहे हैं। इस बार महाकुंभ को ‘एकता का महाकुंभ’ कहा जा रहा है, और ये सच में एकता और समरसता की मिसाल बन चुका है।
लोग यहां से संगम की मिट्टी अपने साथ ले जा रहे हैं, जिससे साफ जाहिर है कि हर कोई अपनी संस्कृति से गहराई से जुड़ रहा है।

सनातन का भविष्य उज्ज्वल

संपूर्णानंद महाराज के अनुसार, ये महाकुंभ युवाओं को जगाने वाला साबित हुआ है। अगर हमारी नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़कर आगे बढ़ेगी, तो समाज में अपराध कम होंगे और समृद्धि बढ़ेगी। ये आयोजन भारत की सकारात्मक ऊर्जा और एकता का प्रतीक बन चुका है।

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