Products Cheaper in Army Canteens? देश की सुरक्षा में तैनात जवान हर मौसम और हर मुश्किल में सीमा पर डटे रहते हैं। ऐसे में सरकार उनकी सुविधा के लिए कई खास योजनाएं चलाती है। इन्हीं में से एक है आर्मी कैंटीन, जिसे कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट यानी CSD कहा जाता है। यह सुविधा खास तौर पर सेना के जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए बनाई गई है। यहां उन्हें बाजार से कम कीमत पर जरूरी सामान उपलब्ध कराया जाता है। इसी वजह से लोग अक्सर आर्मी कैंटीन को लेकर काफी दिलचस्पी दिखाते हैं।
आर्मी कैंटीन में क्या-क्या मिलता है?
आर्मी कैंटीन में रोज इस्तेमाल होने वाली लगभग हर चीज मिल जाती है। यहां खाने-पीने का सामान, ग्रोसरी आइटम, किचन के उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक सामान आसानी से खरीदे जा सकते हैं। इसके अलावा कई कैंटीनों में बाइक और कार भी कम कीमत में उपलब्ध होती हैं। कुछ जगहों पर विदेशी ब्रांड के सामान और शराब भी मिलती है। यही कारण है कि आर्मी कैंटीन को सैनिकों के लिए बड़ी राहत माना जाता है।
सामान इतना सस्ता क्यों मिलता है?
आर्मी कैंटीन में सामान सस्ता मिलने की सबसे बड़ी वजह टैक्स में मिलने वाली छूट है। बाजार में जिस सामान पर ज्यादा टैक्स लगता है, वही सामान कैंटीन में कम टैक्स के साथ मिलता है।
उदाहरण के तौर पर, अगर बाजार में किसी सामान पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता है, तो वही चीज आर्मी कैंटीन में कम टैक्स की वजह से काफी सस्ती हो जाती है। इसी कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, बाइक और कार तक कम कीमत में मिल जाती हैं।
पूरे देश में फैला है नेटवर्क
भारत में आर्मी कैंटीन का नेटवर्क काफी बड़ा है। लेह से लेकर अंडमान निकोबार तक कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट के करीब 33 डिपो मौजूद हैं। इसके अलावा पूरे देश में लगभग 3700 यूनिट रन कैंटीन यानी URC भी चलती हैं। इन कैंटीनों के जरिए सैनिकों और उनके परिवारों तक जरूरी सामान पहुंचाया जाता है।
क्या आम लोग खरीदारी कर सकते हैं?
आर्मी कैंटीन की सुविधा हर किसी के लिए नहीं होती। यहां सिर्फ सेना के जवान, पूर्व सैनिक और उनके परिवार ही खरीदारी कर सकते हैं। खरीदारी के लिए विशेष कार्ड जारी किए जाते हैं। बिना अधिकृत कार्ड के कोई भी व्यक्ति कैंटीन से सामान नहीं खरीद सकता।
खरीदारी की लिमिट भी तय
पहले कुछ लोग जरूरत से ज्यादा सामान खरीद लेते थे, जिससे दूसरे परिवारों को दिक्कत होती थी। इसी वजह से अब खरीदारी की एक तय सीमा बना दी गई है। अब कार्डधारक हर महीने सीमित मात्रा में ही सामान खरीद सकते हैं। इसका मकसद यह है कि सभी जरूरतमंद सैनिकों और उनके परिवारों को बराबर सुविधा मिल सके।
