Cabinet Mitting: मोदी कैबिनेट ने लिए कई अहम फैसले, सरकार ने ATF फंड और प्रदूषण योजना को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने विमान ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी है। साथ ही दिल्ली-एनसीआर में पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को बदलने के लिए नई योजना भी शुरू की जाएगी।

Government’s Big Decision On ATF:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे बड़ी घोषणा विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए की गई है। सरकार ने एयर टरबाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का विशेष फंड बनाने का फैसला किया है।
सरकार का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष की वजह से ईंधन की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। इसका सीधा असर एयरलाइंस कंपनियों के खर्च और यात्रियों पर पड़ सकता है। इसी वजह से यह कदम उठाया गया है।

ATF की कीमतों को स्थिर रखने की तैयारी

कैबिनेट ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को एकमुश्त वित्तीय सहायता देने की मंजूरी दी है। इस योजना के तहत तेल कंपनियों को बिना ब्याज के 10,000 करोड़ रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस राशि का इस्तेमाल एयरलाइंस कंपनियों को अपेक्षाकृत स्थिर कीमत पर ATF उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें कम होंगी, तब तेल कंपनियां यह राशि सरकार को वापस करेंगी। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक पूरी रकम की भरपाई नहीं हो जाती।

सभी भारतीय एयरलाइंस को मिलेगा फायदा

यह योजना उन सभी भारतीय एयरलाइंस के लिए लागू होगी जो इसमें शामिल होना चाहेंगी। इसका लाभ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों को मिलेगा। योजना के तहत एयरलाइंस कंपनियों को ईंधन की अपेक्षाकृत तय और अनुमानित कीमत मिलेगी। इससे अचानक लागत बढ़ने का खतरा कम होगा और कंपनियां अपने खर्च की बेहतर योजना बना सकेंगी।
हालांकि, इस योजना का लाभ लेने वाली एयरलाइंस को अधिकतम तीन वर्षों तक सरकारी तेल कंपनियों से ही ATF खरीदना होगा। इस व्यवस्था की हर साल समीक्षा भी की जाएगी।

एविएशन सेक्टर को कैसे होगा लाभ?

सरकार का कहना है कि इस फैसले से विमानन क्षेत्र में स्थिरता आएगी। हवाई टिकटों की कीमतों में अचानक होने वाली बड़ी बढ़ोतरी पर भी कुछ हद तक नियंत्रण रखा जा सकेगा। इसके अलावा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन सुचारु रूप से जारी रखने में मदद मिलेगी। छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों की हवाई कनेक्टिविटी भी प्रभावित नहीं होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन, होटल, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और निवेश जैसे क्षेत्रों को भी इसका फायदा मिलेगा। साथ ही एविएशन सेक्टर से जुड़ी लाखों नौकरियों की सुरक्षा में भी मदद मिलेगी।

क्यों जरूरी पड़ा यह कदम?

पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर वैश्विक ईंधन बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। मार्च 2026 में ATF की अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 60.50 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं मई 2026 तक यह बढ़कर करीब 142 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई।
यानी सिर्फ दो महीनों में ईंधन की कीमतों में करीब ढाई गुना वृद्धि दर्ज की गई। एयरलाइंस कंपनियों के कुल संचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है। कीमतों में तेज बढ़ोतरी होने पर यह हिस्सा 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद रहने की वजह से भारतीय विमानों को कई अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत दोनों बढ़ गई हैं।

दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों पर भी बड़ा फैसला

कैबिनेट ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए दो साल की विशेष योजना को भी मंजूरी दी है। इस योजना को दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सहयोग से लागू किया जाएगा। योजना के लिए कुल 9,585 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इसका उद्देश्य बीएस-4 और उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले ट्रक और बसों को सड़कों से हटाकर उनकी जगह बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है। केंद्र सरकार वाहन मालिकों को पांच वर्षों तक ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, मासिक ईंधन वाउचर और इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर अतिरिक्त लाभ भी देगी। सरकार का मानना है कि इससे वायु प्रदूषण कम होगा और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार की दोहरी रणनीति

एक तरफ सरकार विमानन क्षेत्र को आर्थिक झटकों से बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम उठा रही है। इन दोनों फैसलों को देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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