Price Hike: दूध के बाद अब ब्रेड हुई महंगी आम आदमी के नाश्ते पर महंगाई की मार,जानिए किंतने पैसे हुए महंगे

देश में बढ़ती महंगाई के बीच अब ब्रेड की कीमतों में ₹5 प्रति पैकेट तक की बढ़ोतरी हुई है। मॉडर्न ब्रेड ने नए दाम लागू कर दिए हैं, जबकि ब्रिटानिया और विब्स भी कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। बढ़ती पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और कच्चे माल की लागत को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है।

Price Hike: देश में लगातार बढ़ रही महंगाई ने अब आम आदमी के नाश्ते पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। दूध की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब ब्रेड भी महंगी हो गई है। देश के प्रमुख ब्रेड ब्रांड्स ने अपने उत्पादों की कीमतों में ₹5 प्रति पैकेट तक का इजाफा कर दिया है, जिसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है।

मॉडर्न ब्रेड ने बढ़ाए दाम

ब्रेड बाजार की बड़ी कंपनी ‘मॉडर्न ब्रेड’ ने अपने बेसिक और प्रीमियम दोनों वेरिएंट्स के दाम बढ़ा दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी की पैरेंट फर्म ग्रुपो बिम्बो ने बढ़ती लागत का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है।

जानकारी के अनुसार अब 400 ग्राम सैंडविच लोफ ₹40 की जगह ₹45 में मिलेगा। वहीं होल व्हीट ब्रेड ₹55 से बढ़कर ₹60 और मल्टीग्रेन ब्रेड ₹65 तक पहुंच गई है। ब्राउन ब्रेड के दाम भी ₹45 से बढ़कर ₹50 हो गए हैं। छोटे पैकेट्स पर भी ₹2 तक की बढ़ोतरी की गई है।

जल्द महंगी हो सकती हैं दूसरी ब्रेड कंपनियां

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मॉडर्न ब्रेड के बाद अब ब्रिटानिया और विब्स जैसे अन्य बड़े ब्रांड्स भी जल्द कीमतों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में ब्रेड बाजार में और महंगाई देखने को मिल सकती है।

क्यों बढ़े ब्रेड के दाम?

ब्रेड कंपनियों के अनुसार पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और मिडिल ईस्ट तनाव के कारण आयात लागत बढ़ी है।

इसके अलावा डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी बढ़ा है। ब्रेड बनाने में इस्तेमाल होने वाले यीस्ट, प्रिजर्वेटिव्स, गैस और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ गया है।

अब बिस्कुट भी हो सकते हैं महंगे

दूध और ब्रेड के बाद अब बाजार विशेषज्ञ बिस्कुट और अन्य बेकरी उत्पादों की कीमतें बढ़ने की भी आशंका जता रहे हैं। लगातार बढ़ती महंगाई से आम उपभोक्ताओं का घरेलू बजट बिगड़ता जा रहा है।

Exit mobile version