CBI Raid: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 661 करोड़ रुपये के कथित सरकारी धन गबन और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले में कार्रवाई तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई को मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला सरकारी विभागों के धन को निजी लाभ के लिए कथित रूप से गलत तरीके से इस्तेमाल करने और बैंकिंग प्रक्रियाओं में अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है।
कई सरकारी विभाग जांच के दायरे में
सीबीआई की जांच में हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। इनमें चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन सोसायटी (CREST) भी शामिल हैं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ सरकारी कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर ऐसे बैंक खाते खुलवाए, जिनका उपयोग सरकारी धन के हस्तांतरण और कथित दुरुपयोग के लिए किया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी की गई और कई वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं।
निजी कंपनी की भूमिका भी जांच के घेरे में
सीबीआई ने नोएडा स्थित एक निजी कंसल्टेंसी कंपनी और उसके निदेशक से जुड़े परिसरों पर भी छापेमारी की। जांच एजेंसी का दावा है कि कथित अपराध से प्राप्त धनराशि कंपनी के बैंक खाते में जमा की गई और बाद में उसे अन्य खातों में स्थानांतरित किया गया।
छापेमारी के दौरान जांच अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े कागजात जब्त किए हैं। इन दस्तावेजों की जांच के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप
सीबीआई के अनुसार, प्रारंभिक जांच में बैंक अधिकारियों और कुछ सरकारी कर्मचारियों के बीच कथित मिलीभगत के संकेत मिले हैं। आरोप है कि धन हस्तांतरण को आसान बनाने और अनियमितताओं पर कार्रवाई न करने के बदले कुछ लोगों ने अनुचित लाभ प्राप्त किए।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा धन का अंतिम उपयोग कहां किया गया।
विशेष अदालत में दाखिल हुआ आरोपपत्र
सीबीआई ने बताया कि मामले में पंचकूला की विशेष अदालत में पहला आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। आरोपपत्र में कुछ सरकारी अधिकारियों की कथित भूमिका और सरकारी धन की हेराफेरी के लिए अपनाए गए तौर-तरीकों का उल्लेख किया गया है।
जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोपियों के खिलाफ भी अतिरिक्त आरोपपत्र दाखिल किए जा सकते हैं। इस बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
