Draupadi Murmu: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के समग्र विकास में भारतीय मूल भाषाओं की अहम भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि एक मजबूत और विकसित भारत का निर्माण अपनी भाषाओं की नींव पर ही संभव है। उन्होंने यह बात एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही, जहां शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान के महत्व पर विशेष चर्चा की गई। राष्ट्रपति ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह किसी भी समाज की संस्कृति, परंपरा और सोच का प्रतिबिंब होती है। यदि हम अपनी भाषाओं को सहेजते और बढ़ावा देते हैं, तो हम अपनी जड़ों को मजबूत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से बच्चों की समझ और रचनात्मकता बेहतर होती है।
शिक्षा में मातृभाषा का महत्व
द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में शिक्षा प्रणाली में भारतीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी भाषा में सीखने का अवसर देना चाहिए, जिससे वे विषयों को गहराई से समझ सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
संस्कृति और पहचान से जुड़ी भाषा
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा हैं। इन्हें संरक्षित करना और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी मातृभाषा पर गर्व करें और उसका उपयोग दैनिक जीवन में अधिक से अधिक करें।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब देश अपनी भाषाओं में सोचता और काम करता है, तो वह अधिक आत्मनिर्भर बनता है। स्थानीय भाषाओं में नवाचार और शोध को बढ़ावा देने से देश के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
