Defence Update: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम, Airbus A321 बनेंगे AEW&C Mk II मजबूत होगी एयर डिफेंस ताकत

DRDO ने AEW&C Mk II कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए AIESL और ADSTL के साथ अहम समझौते किए हैं। 6 A321 विमानों को ग्रीन कॉन्फिगरेशन में बदला जाएगा, जिससे भारत की एयर डिफेंस क्षमता मजबूत होगी।

Major Contract: आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक अहम कदम उठाया है। DRDO के सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (CABS) ने नई दिल्ली में AI Engineering Services Limited (AIESL) के साथ 6 A321 विमानों को कमर्शियल कॉन्फिगरेशन से ‘ग्रीन कॉन्फिगरेशन’ में बदलने के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। इस बदलाव का उद्देश्य इन विमानों को Airborne Early Warning and Control (AEW&C) Mk II कार्यक्रम के लिए तैयार करना है। इस समझौते से इस महत्वपूर्ण स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम के विकास और उत्पादन को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा।

ADSTL की भूमिका

AEW&C Mk II कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए DRDO ने अहमदाबाद स्थित Adani Defence Systems and Technologies Limited (ADSTL) के साथ भी अलग समझौता किया है। ADSTL को इस कार्यक्रम के लिए Mission Systems के Development-cum-Production Partner (DcPP) के तौर पर शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि कंपनी मिशन सिस्टम के विकास से लेकर उसके उत्पादन तक की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे देश की निजी रक्षा कंपनियों की विशेषज्ञता को स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं से जोड़ने में मदद मिलेगी।

नई दिल्ली में साइन हुए समझौते

दोनों कॉन्ट्रैक्ट 22 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान साइन किए गए। इस मौके पर रक्षा सचिव, Department of Defence R&D के सचिव और DRDO चेयरमैन राजेश कुमार सिंह मौजूद रहे। समझौतों पर CABS के डायरेक्टर, AIESL के CEO और ADSTL के Head-Airborne Platform ने हस्ताक्षर किए। इन समझौतों को AEW&C Mk II कार्यक्रम की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

लंबी दूरी की निगरानी

AEW&C Mk II सिस्टम को तैयार करने में CABS की अहम भूमिका होगी। ADSTL के Development-cum-Production Partner के रूप में सहयोग के साथ CABS, Airbus Defence and Space द्वारा उपलब्ध कराए गए मॉडिफाइड AEW&C Mk II प्लेटफॉर्म पर मिशन सिस्टम्स को इंटीग्रेट करेगा। इसके बाद भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर विमान की फ्लाइट टेस्टिंग भी की जाएगी। इस प्रक्रिया में Centre for Military Airworthiness and Certification (CEMILAC) और Directorate General of Aeronautical Quality Assurance (DGAQA) जैसी एजेंसियों से जरूरी सर्टिफिकेशन हासिल किया जाएगा।

एयर डिफेंस होगी मजबूत

DRDO का AEW&C Mk II सिस्टम पहले से ज्यादा एडवांस क्षमताओं से लैस होगा। CABS इस प्रोग्राम की नोडल लैबोरेटरी है। नए सिस्टम में बेहतर एंड्योरेंस, एडवांस्ड एयरबोर्न सर्विलांस, सुरक्षित कम्युनिकेशन और मजबूत सिचुएशनल अवेयरनेस जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही कमांड और कंट्रोल क्षमता भी पहले के मुकाबले बेहतर होगी। इससे भारतीय वायु सेना को हवा में दूर तक निगरानी रखने और संभावित खतरों का समय रहते पता लगाने में मदद मिलेगी। जरूरत पड़ने पर लंबी दूरी से आने वाले खतरों से निपटने की क्षमता भी मजबूत होगी।

आत्मनिर्भरता को बढ़ावा

इस परियोजना में सरकारी रक्षा संस्थानों के साथ भारतीय उद्योगों की भागीदारी देश के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। AIESL और ADSTL जैसी कंपनियों को कार्यक्रम से जोड़ने से भारत में डिजाइन, इंजीनियरिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य देश में ऐसा मजबूत डिफेंस इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां अत्याधुनिक रक्षा तकनीक का विकास और उत्पादन भारत में ही हो सके। AEW&C Mk II कार्यक्रम इसी दिशा में भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को नई मजबूती देने वाला अहम प्रोजेक्ट साबित हो सकता है।

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