Export Duty Cut on Fuel Products: केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कमी करने का फैसला किया है। यह नई दरें 1 जून से शुरू होने वाले अगले पखवाड़े के लिए लागू होंगी। सरकार ने शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी। नए फैसले के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क घटाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं डीजल पर यह शुल्क 13.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। इसके अलावा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) यानी हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन पर निर्यात शुल्क 9.5 रुपये प्रति लीटर रखा गया है।
वैश्विक हालात का पड़ा असर
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष के चलते तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्गों पर पैदा हुई चुनौतियों ने भी बाजार में चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है।
हर दो हफ्ते में होती है समीक्षा
पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले निर्यात शुल्क की समीक्षा हर 15 दिन में की जाती है। सरकार यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों को ध्यान में रखकर लेती है। इसी प्रक्रिया के तहत इस बार शुल्क में कटौती की गई है। इसका उद्देश्य बदलते वैश्विक हालात के अनुसार कर व्यवस्था को संतुलित बनाए रखना है।
घरेलू कीमतों में नहीं मिलेगी राहत
हालांकि निर्यात शुल्क में कमी की गई है, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल कोई राहत नहीं है। सरकार ने साफ किया है कि देश में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में किसी प्रकार की कमी होने की संभावना नहीं है। आम लोगों को ईंधन की कीमतों के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है।
मई में बढ़ाई गई थीं दरें
इससे पहले 16 मई को सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया था। वहीं डीजल और एटीएफ पर शुल्क क्रमशः 16.5 रुपये और 16 रुपये प्रति लीटर तय किया गया था। अब नई समीक्षा के बाद इन दरों में कमी की गई है, जिससे तेल कंपनियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
क्यों लगाया गया था यह शुल्क?
सरकार ने 27 मार्च, 2026 को पेट्रोलियम उत्पादों पर यह विशेष शुल्क लागू किया था। उस समय पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई थी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए अत्यधिक निर्यात न करें। सरकार घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना चाहती थी।
