Book Controversy: जनरल नरवणे की किताब पर रोक क्यों? अटकी मंजूरी, लद्दाख तनाव के खुलासों पर सियासी उठापटक तेज

पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की किताब को रक्षा मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिली है। लद्दाख तनाव से जुड़े कथित खुलासों के कारण समीक्षा जारी है। इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है।

Four Stars of Destiny Book Controversy: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को अब तक रक्षा मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिली है। यह वही किताब है जिसका जिक्र हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने किया था, जिसके बाद संसद में काफी हंगामा भी हुआ था।

RTI से हुआ खुलासा

एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूचना के अधिकार यानी RTI से मिली जानकारी में बताया गया है कि रक्षा मंत्रालय के पास 2020 से 2024 के बीच कुल 35 सैन्य अधिकारियों की किताबों के प्रस्ताव मंजूरी के लिए आए थे। इनमें से 32 किताबों को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि तीन किताबें लंबित थीं।

अब सिर्फ एक किताब बाकी

RTI में बताया गया कि लंबित तीन किताबों में से पूर्व सेना प्रमुख जनरल एन.सी. विज की किताब ‘अलोन इन द रिंग’ मई 2025 में रिलीज हो चुकी है। वहीं ब्रिगेडियर जीवन राजपुरोहित की किताब को भी मंजूरी मिल गई है। अब केवल जनरल नरवणे की किताब ही ऐसी है जो अभी तक मंत्रालय में समीक्षा के अधीन है।

क्या है किताब में खास

जनरल नरवणे 2019 से 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे। इसी दौरान पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर तनाव काफी बढ़ गया था। उनकी किताब दिसंबर 2023 में प्रकाशित हुई और इसके कुछ हिस्सों को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हलकों में चर्चा तेज हो गई।

लद्दाख विवाद का जिक्र

राहुल गांधी का दावा है कि इस किताब में 31 अगस्त 2020 की उस रात का जिक्र किया गया है, जब चीनी टैंक रेचिन ला क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि किताब में बताया गया है कि उस समय हालात बेहद कठिन थे और तुरंत बड़े सैन्य फैसले लेने पड़े।

‘हॉट पोटैटो’ वाला बयान

राहुल गांधी के अनुसार, किताब में यह भी लिखा गया है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बातचीत के दौरान उन्हें एक बेहद मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा। इस वजह से माना जा रहा है कि संवेदनशील सैन्य जानकारी के कारण रक्षा मंत्रालय किताब की गहराई से समीक्षा कर रहा है।

अन्य अधिकारियों की किताबें मंजूर

हाल ही में कई पूर्व सैन्य अधिकारियों की किताबों को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें लेफ्टिनेंट जनरल एस.ए. हसनैन, मेजर जनरल जी.डी. बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके बावजूद नरवणे की किताब पर फैसला लंबित है।

सियासी बयानबाजी तेज

इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार पूर्व सेना प्रमुख का सम्मान करती है और विपक्ष इस मामले को बेवजह तूल दे रहा है। वहीं प्रकाशक और रक्षा मंत्रालय ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

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