Guwahati Hotel Murder Encounter: असम के गुवाहाटी में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या के आरोपी घनकांत गोगोई को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है। पुलिस के मुताबिक, 3 नवंबर को उसे गुवाहाटी से शिवसागर ले जाया जा रहा था। रास्ते में उसने पुलिस अधिकारी की सर्विस पिस्टल छीनने की कोशिश की। इसी दौरान हुई गोलीबारी में वह घायल हो गया। अस्पताल पहुंचने तक उसकी मौत हो चुकी थी।
पुलिस हिरासत में कैसे हुई मुठभेड़?
एसएसपी पपोरी चेतिया के मुताबिक, आरोपी को केस नंबर 10806 के सिलसिले में गुवाहाटी से शिवसागर ले जाया जा रहा था। रास्ते में उसने शौच के लिए गाड़ी रुकवाई। जब पुलिसकर्मी उसे वाहन से नीचे उतार रहे थे, तभी उसने जांच अधिकारी की सर्विस पिस्टल छीनने की कोशिश की।
इस दौरान छीना-झपटी हुई और तीन गोलियां चलीं। पुलिस के मुताबिक, दो गोलियां गाड़ी के अंदर मिलीं। जांच अधिकारी को गोली लगने का खतरा देखते हुए दूसरे पुलिस सुरक्षा अधिकारी (PSO) ने अपनी सर्विस गन से फायरिंग की। इसमें घनकांत गोगोई को गोली लग गई।
पुलिस अधिकारी भी हुआ घायल
मुठभेड़ के दौरान जांच अधिकारी के पैर में गोली लगी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई। वहीं, घायल आरोपी को भी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
होटल के विवाद में हुई थी फायरिंग
यह मामला 26 अक्टूबर को गुवाहाटी के बिलास इन होटल में हुई गोलीबारी से जुड़ा है। जांच के मुताबिक, घनकांत गोगोई ने होटल को पांच साल के लिए लीज पर लिया था, जबकि इसका मालिकाना हक भराली परिवार के पास था।
10 सितंबर 2025 को हुए लीज समझौते में हर महीने 1.8 लाख रुपये किराया तय किया गया था। 26 अक्टूबर को दोनों पक्षों के लोग होटल में विवाद सुलझाने के लिए एकत्र हुए थे। इसी दौरान बातचीत बहस और फिर हाथापाई में बदल गई।
लाइसेंसी पिस्टल से की थी फायरिंग
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, विवाद बढ़ने पर घनकांत गोगोई ने अपनी .32 बोर की लाइसेंसी पिस्टल निकालकर गोलीबारी कर दी। इस घटना में छह लोगों को गोली लगी थी। इनमें पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ था।
मृतकों में पांच लोग एक ही परिवार से जुड़े थे और एक अन्य व्यक्ति उस परिवार के लिए काम करता था। घटना के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था।
जांच के लिए बनाई गई थी SIT
हत्याकांड की जांच के लिए 27 अक्टूबर को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। इसी दिन आरोपी को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया था। घटना के बाद पीड़ित परिवार के सदस्यों ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और एनकाउंटर की मांग की थी।
















