Helmet Fine Rules: अब बाइक पर पीछे बैठने वाले को भी पहनना होगा हेलमेट? नहीं तो कट सकता है चालान

भारत में दोपहिया वाहन पर पीछे बैठने वाले यात्री के लिए भी हेलमेट पहनना अनिवार्य है। हेलमेट नहीं पहनने पर ₹1,000 तक का चालान कट सकता है। कई राज्यों में नियमों के उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। सड़क सुरक्षा के लिए ISI मार्क वाला हेलमेट पहनना जरूरी है।

Helmet Fine Rules: देश में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए ट्रैफिक नियमों को लगातार सख्त किया जा रहा है। इसके बावजूद आज भी कई लोग दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने में लापरवाही करते हैं। खासकर बाइक या स्कूटर पर पीछे बैठने वाले यात्री अक्सर यह मान लेते हैं कि उनके लिए हेलमेट जरूरी नहीं है। जबकि मोटर वाहन नियमों के अनुसार यह धारणा गलत है।

पिलियन राइडर के लिए भी हेलमेट अनिवार्य

ट्रैफिक नियमों के मुताबिक दोपहिया वाहन पर पीछे बैठने वाले यात्री (पिलियन राइडर) के लिए भी हेलमेट पहनना अनिवार्य है। यदि पीछे बैठा व्यक्ति बिना हेलमेट के सफर करता है, तो वाहन चालक पर चालान की कार्रवाई की जा सकती है। कई मामलों में ₹1,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कुछ राज्यों में स्थानीय नियमों के अनुसार ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने जैसी अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है।

सिर्फ ISI मार्क वाला हेलमेट ही मान्य

कई लोग चालान से बचने के लिए हल्के या गैर-मानक हेलमेट का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि नियमों के अनुसार केवल ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) से प्रमाणित ISI मार्क वाला हेलमेट ही मान्य माना जाता है। खराब गुणवत्ता या बिना ISI मार्क वाले हेलमेट का उपयोग करने पर भी कार्रवाई हो सकती है।

सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं नियम

विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क हादसों में सिर की चोट सबसे गंभीर होती है। ऐसे में हेलमेट दुर्घटना के दौरान जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही वजह है कि चालक और पीछे बैठने वाले दोनों के लिए हेलमेट पहनना जरूरी किया गया है।

यात्रा से पहले रखें इन बातों का ध्यान

बाइक या स्कूटर से सफर करते समय चालक और पिलियन राइडर दोनों ISI मार्क वाला हेलमेट पहनें। हेलमेट की स्ट्रैप अच्छी तरह बांधें और केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रैफिक नियमों का पालन करें। इससे न केवल जुर्माने से बचा जा सकता है, बल्कि सड़क दुर्घटना की स्थिति में गंभीर चोट का खतरा भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

Exit mobile version