Emergency Gas Supply Rules: केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति से जुड़े अधिकतर आपातकालीन नियम वापस ले लिए हैं। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम के बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एलएनजी की आवाजाही फिर से सामान्य होने लगी है। इससे भारत समेत कई देशों को राहत मिली है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है।
तनाव के समय बढ़ी थी चिंता
इस साल पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले एलएनजी जहाजों पर पड़ा था। कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई और कुछ अंतरराष्ट्रीय गैस कंपनियों ने आपूर्ति रोक दी या दूसरी जगह भेज दी। इससे भारत में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई थी। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026 लागू किया था।
सरकार ने ऐसे संभाली स्थिति
आपात स्थिति में सरकार ने घरेलू गैस और आयातित एलएनजी की आपूर्ति को सबसे जरूरी क्षेत्रों के लिए सुरक्षित कर दिया था। घरों में इस्तेमाल होने वाली पीएनजी, वाहनों के लिए सीएनजी, एलपीजी बनाने वाली इकाइयों और गैस पाइपलाइन सेवाओं को उनकी जरूरत के मुताबिक पूरी गैस उपलब्ध कराई गई। वहीं उर्वरक कंपनियों को लगभग 70 प्रतिशत और उद्योगों व सिटी गैस नेटवर्क को करीब 80 प्रतिशत गैस देने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए पेट्रोकेमिकल कंपनियों, गैस आधारित बिजली संयंत्रों और कुछ रिफाइनरियों की गैस आपूर्ति में अस्थायी कटौती की गई थी, ताकि जरूरी सेवाओं पर किसी तरह का असर न पड़े।
अब क्यों हटाए गए नियम
सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में हालात पहले से काफी बेहतर हो चुके हैं। ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम, लगातार चल रही बातचीत और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की सामान्य आवाजाही के कारण गैस आपूर्ति का संकट काफी हद तक खत्म हो गया है। इसी वजह से मार्च में लागू किए गए अधिकतर आपातकालीन नियम अब वापस ले लिए गए हैं।
भारत के लिए क्यों है अहम फैसला
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की करीब 50 प्रतिशत जरूरत विदेशों से पूरी करता है। इनमें भी लगभग 40 से 45 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 65 प्रतिशत एलएनजी पश्चिम एशिया से आती है। इसलिए इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
उद्योगों को मिलेगी राहत
संकट के दौरान सरकार ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और बड़े उपभोक्ताओं को डीजल की सीमित बिक्री जैसे कदम भी उठाए थे। हालात सामान्य होने के बाद ये प्रतिबंध पहले ही हटा दिए गए थे और अब गैस आपूर्ति से जुड़े विशेष नियम भी समाप्त कर दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि गैस की आपूर्ति सामान्य होने से उद्योगों, उर्वरक कंपनियों और बिजली उत्पादन क्षेत्र को राहत मिलेगी। इससे उत्पादन लागत कम रखने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर बनाए रखेगी और जरूरत पड़ने पर दोबारा जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।
ऊर्जा सुरक्षा को मिली मजबूती
एलएनजी की नियमित आपूर्ति दोबारा शुरू होने से फिलहाल भारत पर ऊर्जा संकट का खतरा काफी कम हो गया है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, उद्योगों को स्थिर गैस मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
