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Infection Claim: भारत यात्रा के बाद संक्रमण के दावे पर छिड़ी बहस, सोशल मीडिया पर पश्चिमी मीडिया को लोगों ने घेरा

India Travel Infection Claim: 42 वर्षीय ब्रिटिश महिला लोरी डेनमैन इन दिनों पश्चिमी मीडिया की सुर्खियों में हैं। खबरों के मुताबिक, उनके दिमाग में 38 परजीवी सिस्ट पाए गए हैं। महिला और कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि वर्ष 2007 में भारत की करीब दो महीने की यात्रा के दौरान उन्हें सूअर के फीताकृमि से जुड़ा दुर्लभ संक्रमण, जिसे न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस कहा जाता है, हुआ था। हालांकि, इस दावे को लेकर भारत में सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है।

लोगों ने उठाए कई सवाल

भारत में कई सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि करीब 19 साल पहले की यात्रा को अचानक इस तरह चर्चा में लाना कई सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है, जिससे यह साफ तौर पर साबित हो सके कि संक्रमण भारत यात्रा के दौरान ही हुआ था। इसी वजह से कई लोग इस पूरे मामले पर सवाल उठा रहे हैं।

भारत की छवि खराब करने का आरोप

सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग इस खबर को भारत विरोधी माहौल बनाने की कोशिश बता रहे हैं। उनका कहना है कि विदेशी मीडिया अक्सर भारत को गंदगी और अस्वच्छता से जोड़कर पेश करता है। कई यूजर्स का आरोप है कि पुराने मामले को फिर से सामने लाकर दुनिया भर के पर्यटकों के बीच भारत की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।

लोगों का यह भी कहना है कि अगर किसी बीमारी के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं, तो बिना स्पष्ट और पुख्ता सबूत किसी एक देश को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं माना जा सकता।

मीम्स और तंज की भी आई बाढ़

इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सिर्फ नाराजगी ही नहीं, बल्कि मजेदार मीम्स और तंज भी खूब देखने को मिल रहे हैं। कई भारतीय यूजर्स ब्रिटिश महिला के दावे पर सवाल उठाते हुए अलग-अलग उदाहरण दे रहे हैं।

कुछ लोगों ने ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का जिक्र करते हुए लिखा कि वह वर्ष 1997 में भारत आई थीं और उनका निधन 2022 में हुआ। ऐसे में क्या उनके निधन का कारण भी भारत यात्रा को माना जाएगा? इस तरह के पोस्ट के जरिए लोग यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि इतने लंबे समय बाद किसी बीमारी का कारण केवल एक पुरानी यात्रा को बताना तर्कसंगत नहीं लगता।

बहस अभी भी जारी

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर महिला और कुछ विशेषज्ञ अपने दावे पर कायम हैं, वहीं दूसरी ओर भारत में बड़ी संख्या में लोग इस दावे को बिना पर्याप्त सबूत के भारत की छवि खराब करने की कोशिश मान रहे हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष वैज्ञानिक जांच और प्रमाणों के आधार पर ही तय किया जा सकता है।

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