Increases Household Expenses: घरेलू रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम लगातार बढ़ाकर आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकारी कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए आम जनता की जेब पर असर डालें, तो यह लोगों के लिए चिंता का विषय है। तिवारी ने लोगों से महंगाई के मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की भी अपील की।
तीन महीने में दूसरी बार बढ़े दाम
घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का सामना करना पड़ा है। तेल विपणन कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बार है जब घरेलू गैस सिलेंडर महंगा हुआ है। नई कीमतें लागू होने के बाद देश के अलग-अलग शहरों में उपभोक्ताओं को अब पहले से अधिक भुगतान करना होगा। इससे आम परिवारों के मासिक खर्च पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
क्यों बढ़ाई गई कीमत?
सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसके अलावा परिवहन खर्च और अन्य संचालन लागत भी समय-समय पर बढ़ती रहती है। इन्हीं कारणों को देखते हुए गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव किया जाता है। हालांकि, आम लोगों के लिए यह तर्क राहत देने वाला नहीं है, क्योंकि उन्हें हर महीने अपने बजट को संतुलित करना पड़ता है।
बड़े शहरों में लागू हुई नई दरें
नई दरों के अनुसार दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, पटना और जयपुर समेत कई बड़े शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं। रसोई गैस हर घर की जरूरी जरूरत है, इसलिए इसकी कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी भी परिवारों के खर्च को प्रभावित करती है। विशेष रूप से मध्यम वर्ग और कम आय वाले परिवारों को इसका ज्यादा असर महसूस हो सकता है। पहले से बढ़ती खाद्य सामग्री, बिजली और परिवहन लागत के बीच यह बढ़ोतरी लोगों की चिंता बढ़ा रही है।
उपभोक्ताओं में बढ़ रही नाराजगी
लगातार बढ़ती कीमतों के कारण कई उपभोक्ता नाराज नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि घर का बजट संभालना पहले से ही मुश्किल हो रहा है और अब गैस सिलेंडर की बढ़ी कीमत ने परेशानी और बढ़ा दी है। हालांकि, उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलने वाली सब्सिडी कुछ राहत देती है, लेकिन सामान्य उपभोक्ताओं को पूरी बढ़ी हुई कीमत चुकानी पड़ती है।
आगे भी बदल सकती हैं कीमतें
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तो आने वाले समय में भी कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है। भले ही 29 रुपये की बढ़ोतरी छोटी दिखाई दे, लेकिन करोड़ों परिवारों के लिए यह महंगाई का एक और बोझ है, जो उनकी मासिक आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
