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LDA in Action दिल्ली हादसे से लिया सबक, 25 साल पुरानी जर्जर इमारतों का होगा सर्वे, कमजोर ढांचे पर चलेगा बुलडोजर

Lucknow LDA Building Survey: दिल्ली में पांच मंजिला पीजी हॉस्टल ढहने से सात लोगों की मौत के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी एलडीए ने जर्जर इमारतों को लेकर कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है। अब एलडीए अपनी कॉलोनियों में 25 साल से अधिक पुरानी और कमजोर इमारतों की पहचान कराएगा।

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। अभी तक ऐसी पुरानी और जर्जर इमारतों के सर्वे की जिम्मेदारी मुख्य रूप से नगर निगम के पास थी। अब एलडीए भी अपनी योजनाओं में बने पुराने भवनों की स्थिति की जांच करेगा।

सात जोन में होगा सर्वे

एलडीए के आदेश के मुताबिक गोमतीनगर, अलीगंज, जानकीपुरम, कानपुर रोड, शारदा नगर, महानगर और आशियाना समेत प्राधिकरण की सभी योजनाओं में पुरानी इमारतों को चिह्नित किया जाएगा।

इसके लिए एलडीए के सभी सात जोनों के अधिकारियों को कम से कम 20-20 पुरानी और जर्जर इमारतें सूचीबद्ध करने का लक्ष्य दिया गया है। सर्वे के दौरान भवनों की स्थिति और उनके ढांचे से जुड़े जोखिमों का आकलन किया जाएगा।

कमजोर भवनों पर होगी कार्रवाई

पुरानी इमारतों की सूची तैयार होने के बाद उनका स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि भवन का ढांचा रहने या व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है या नहीं।

अगर जांच में किसी भवन का ढांचा कमजोर पाया जाता है तो भवन स्वामी को तय समय के भीतर मरम्मत कराने या भवन को खुद ध्वस्त करने का नोटिस दिया जाएगा। तय समय में कार्रवाई नहीं होने पर एलडीए खुद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर सकता है।

अलीगंज पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

इसी बीच गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में ‘लोकनाथन बनाम तमिलनाडु’ मामले के साथ लखनऊ के अलीगंज में मौजूद खतरनाक अवैध निर्माणों को लेकर भी अहम सुनवाई होनी है।

शीर्ष अदालत ने 22 जून को अलीगंज के एक आवासीय भूखंड पर बने अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में आग लगने की घटना का कड़ा संज्ञान लिया था। इसके बाद एलडीए ने अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने रखी थी।

51 निर्माणों पर नजर

एलडीए की रिपोर्ट के अनुसार अलीगंज में आवासीय भू-उपयोग वाली जमीन पर 51 व्यावसायिक निर्माण चिह्नित किए गए हैं। इनमें से 39 भवन स्वामियों ने शमन यानी कम्पाउंडिंग के लिए आवेदन किया है, जबकि 17 लोगों ने शमन शुल्क भी जमा कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की टीम 5 और 6 सितंबर को इन इमारतों का सर्वे कर चुकी है। अब मामले में अपना पक्ष रखने के लिए एलडीए की टीम दिल्ली पहुंच गई है। ऐसे में अलीगंज के इन निर्माणों पर होने वाली सुनवाई को अहम माना जा रहा है।

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