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Maharashtra News: महाराष्ट्र में ‘मराठी’ नहीं तो लाइसेंस नहीं! ऑटो-टैक्सी चालकों पर नया फरमान, जानें क्या है नियम

महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना, पढ़ना और लिखना अनिवार्य कर दिया है। 1 मई तक का अल्टीमेटम दिया गया है, वरना लाइसेंस रद्द होंगे। प्रवासी चालकों में भारी रोष है और यूनियन ने 4 मई से राज्यव्यापी चक्का जाम की चेतावनी दी है। यूनियन का आरोप है कि यह निजी कंपनियों को फायदा पहुँचाने की साजिश है।

Sadaf Farooqui by Sadaf Farooqui
April 22, 2026
in राष्ट्रीय
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AutoTaxi Strike:  महाराष्ट्र सरकार द्वारा ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए जारी किए गए नए ‘भाषाई फरमान’ ने राज्य की राजनीति और परिवहन जगत में उबाल ला दिया है। 1 मई की समयसीमा और लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी के बाद लाखों प्रवासी चालकों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
महाराष्ट्र सरकार के एक नए आदेश ने राज्य के लाखों ऑटो और टैक्सी चालकों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब राज्य में परमिट के लिए मराठी भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य होगा। चालकों को न केवल मराठी बोलनी आनी चाहिए, बल्कि उसे लिखना और पढ़ना भी जरूरी है। ऐसा न करने पर लाइसेंस और परमिट रद्द करने की घोषणा की गई है।

लाखों प्रवासियों पर संकट

इस फैसले का सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश और बिहार से आए उन लाखों चालकों पर पड़ा है, जो दशकों से मुंबई की सड़कों पर रोजी-रोटी कमा रहे हैं।
* दर्द और बेबसी: कई चालकों का कहना है कि वे काम चलाने लायक मराठी बोल लेते हैं, लेकिन अचानक लिखना-पढ़ना सीखना उनके लिए नामुमकिन है।
* पलायन का डर: चालकों ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने अपनी जिद नहीं छोड़ी, तो वे अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर वापस अपने गांव लौट जाएंगे।

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यूनियन का कड़ा विरोध

महाराष्ट्र ऑटो एंड टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष शशांक राव ने इस फरमान को ‘अव्यावहारिक’ और ‘अनुचित’ बताया है।
* कानूनी तर्क: राव का कहना है कि जिन चालकों के पास पहले से वैध परमिट हैं, उन्होंने 15 साल रहने की शर्त समेत सभी पुराने नियमों का पालन किया है। अब बीच में नया नियम थोपना कानूनी रूप से गलत है।
* निजीकरण का आरोप: यूनियन ने आरोप लगाया है कि सरकार परिवहन क्षेत्र को निजी कॉर्पोरेट कंपनियों के हाथों में सौंपना चाहती है, इसलिए गरीब चालकों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।

परिवहन मंत्री पर तीखा हमला

शशांक राव ने परिवहन मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, “मंत्री जी खुद एक बिल्डर हैं। क्या वे फ्लैट बेचते समय ग्राहक की भाषा पूछते हैं? फिर गरीब चालकों पर ही यह भाषाई नियम क्यों?”

4 मई से उग्र प्रदर्शन की चेतावनी

यूनियन ने सरकार को झुकने के लिए 1 मई तक का समय दिया है। यदि फैसला वापस नहीं लिया गया, तो:
1. चक्का जाम: 4 मई से पूरे महाराष्ट्र में उग्र प्रदर्शन और चक्का जाम किया जाएगा।
2. बड़ा प्रभाव: मुंबई में 5 लाख और पूरे महाराष्ट्र में लगभग 18 लाख ऑटो-टैक्सी चालक इस विरोध का हिस्सा बनेंगे, जिससे राज्य की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।

Tags: AutoTaxi StrikeMarathi Mandatory
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Sadaf Farooqui

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