G7 Summit में मोदी-ट्रंप होगी मुलाकात, तीन भारतीय नाविकों की मौत पर विपक्ष ने सरकार को घेरा क्या ट्रंप के सामने यह मुद्दा उठाएंगे पी एम

खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। अब सबकी नजर जी7 सम्मेलन में होने वाली मोदी और ट्रंप की मुलाकात पर टिकी है।

Modi Trump Meeting G7 Summit: खाड़ी क्षेत्र में एक व्यावसायिक जहाज पर हुई अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के संबंधों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक लगातार सवाल उठ रहे हैं कि भारत सरकार इस मुद्दे पर कितना सख्त रुख अपनाएगी। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने जा रहे हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात भी प्रस्तावित है, इसलिए इस मुद्दे की अहमियत और बढ़ गई है।

भारत ने दर्ज कराया विरोध

घटना के बाद भारत सरकार ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत कर इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

भारत की ओर से कहा गया कि व्यावसायिक जहाजों पर इस तरह की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती और इसमें भारतीय नागरिकों की जान जाना बेहद दुखद है। भारत ने यह भी दोहराया कि समुद्री मार्गों पर काम कर रहे नाविकों और नागरिक जहाजों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
बताया जा रहा है कि भारत ने इस मामले में अमेरिकी राजनयिक को भी विदेश मंत्रालय बुलाकर अपना विरोध दर्ज कराया है।

अमेरिका ने क्या कहा?

भारत की आपत्ति के कुछ घंटे बाद अमेरिका की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के लिए सभी व्यावसायिक जहाजों को अमेरिकी बलों के निर्देशों का पालन करना चाहिए। अमेरिका का कहना है कि वह क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और प्रतिबंधों के उल्लंघन को रोकने के लिए कार्रवाई कर रहा है। हालांकि भारतीय नाविकों की मौत को लेकर अमेरिका की प्रतिक्रिया को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया है। राहुल गांधी का कहना है कि जब किसी विदेशी देश की कार्रवाई में भारतीय नागरिकों की जान जाती है, तब सरकार को खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में पर्याप्त सख्ती नहीं दिखा रही है। विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी इसी तरह के सवाल उठाए हैं और सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।

शशि थरूर ने भी जताई नाराजगी

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिक्रिया में भारतीय नागरिकों की मौत पर संवेदना या दुख का स्पष्ट उल्लेख नहीं दिखा।

थरूर ने सवाल उठाया कि दुनिया के कई समुद्री मार्गों पर भारतीय नाविक काम करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर अधिक संवेदनशीलता दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इस मुद्दे को उचित स्तर पर उठाएगा।
जी7 सम्मेलन पर टिकी नजरें

इस पूरे विवाद के बीच प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस पहुंच चुके हैं, जहां वह 16 और 17 जून को होने वाले जी7 सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के दौरान उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होने की संभावना है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, वैश्विक सुरक्षा, पश्चिम एशिया की स्थिति और द्विपक्षीय संबंधों जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इसी कारण अब यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा भी बातचीत का हिस्सा बनेगा।

व्यापार और कूटनीति भी अहम

भारत और अमेरिका इस समय एक नए व्यापार समझौते पर भी काम कर रहे हैं। जी7 सम्मेलन के बाद दोनों देशों के अधिकारियों के बीच व्यापारिक बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि खाड़ी क्षेत्र में हुई घटना ने दोनों देशों के रिश्तों में एक नया संवेदनशील मुद्दा जोड़ दिया है। भारत लगातार नाविकों और व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा पर जोर देता रहा है, जबकि अमेरिका क्षेत्र में अपनी सुरक्षा नीति को लागू करने की बात कर रहा है।

अब आगे क्या हो सकता हैं

फिलहाल इस पूरे मामले पर देश और दुनिया की नजर बनी हुई है। राजनीतिक दल, विशेषज्ञ और आम लोग यह जानना चाहते हैं कि भारत इस मुद्दे को किस स्तर तक उठाता है। जी7 सम्मेलन में होने वाली मोदी-ट्रंप मुलाकात अब केवल व्यापार और वैश्विक राजनीति तक सीमित नहीं रह गई है। भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि इस मामले में दोनों देशों का रुख क्या रहता है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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