Nitish Kumar Takes Oath in Rajya Sabha:बिहार की राजनीति में लंबे समय तक अहम भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार अब दिल्ली की राजनीति का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले ली है। इससे पहले वे बिहार विधान परिषद से इस्तीफा दे चुके थे। उनके इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है।
पूरा हुआ पुराना सपना
नीतीश कुमार ने खुद कई बार कहा था कि संसद और राज्य के सभी सदनों का सदस्य बनना उनका सपना रहा है। वे पहले ही बिहार विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। केवल राज्यसभा बाकी थी, जो अब पूरी हो गई है। ऐसे में कहा जा सकता है कि उनका राजनीतिक सपना अब पूरा हो गया है।
बिहार चुनाव के बाद बड़ा फैसला
करीब छह महीने पहले हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन को बड़ी जीत मिली थी। 243 सीटों में से गठबंधन ने 202 सीटें जीतीं। इसमें भाजपा को 89 और जेडीयू को 85 सीटें मिलीं। इसके बाद नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
हालांकि, इसके कुछ समय बाद ही उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर सबको चौंका दिया।
फैसले से बढ़ी सियासी हलचल
राज्यसभा जाने के फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई। विपक्षी दल लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी ने इस पर सवाल उठाए। वहीं, उनकी अपनी पार्टी जेडीयू के कुछ नेताओं को भी यह फैसला समझ नहीं आया।
इतना ही नहीं, कुछ नेताओं ने विरोध में धरना भी दिया। बाद में नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी इच्छा साफ की और कहा कि यह उनका व्यक्तिगत सपना था।
सीएम पद को लेकर सवाल
अब जब नीतीश कुमार दिल्ली पहुंच चुके हैं, तो बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अभी तक यह साफ नहीं है कि राज्य की कमान किसे सौंपी जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
आगे की राजनीति पर नजर
नीतीश कुमार के राज्यसभा पहुंचने के बाद अब उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में और बढ़ सकती है। दिल्ली में उनकी सक्रियता आने वाले समय में नए राजनीतिक समीकरण भी बना सकती है। फिलहाल, सबकी नजर इस बात पर है कि बिहार में अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा और आगे की सियासत किस दिशा में जाएगी।





