Ahmedabad Plane Crash: छलका दर्द, बताया हादसे के बाद का संघर्ष, मौत को छुकर लौटे यात्री की दर्दभरी कहानी

विमान हादसे में बचने वाले विश्वास कुमार रमेश ने एक साल बाद अपने मानसिक संघर्ष का दर्द साझा किया। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद सर्वाइवर गिल्ट, डर और लोगों के व्यवहार ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया।

पिछले साल 12 जून का दिन विश्वास कुमार रमेश कभी नहीं भूल सकते। वह एक सामान्य हवाई यात्रा पर थे और सब कुछ ठीक चल रहा था। तभी अचानक विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह तेजी से नीचे आने लगा। विमान के अंदर अफरा-तफरी मच गई। यात्रियों की चीखें गूंजने लगीं और कुछ ही क्षण बाद जोरदार धमाका हुआ। हादसे के बाद जब बचाव दल मौके पर पहुंचा, तो चारों तरफ सिर्फ मलबा और आग दिखाई दे रही थी। किसी के जिंदा बचने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी।

इसी दौरान मलबे के बीच से विश्वास कुमार रमेश जीवित मिले। उन्हें मामूली चोटें आई थीं। इस घटना को लोगों ने किसी चमत्कार से कम नहीं माना।

असली संघर्ष हादसे के बाद शुरू हुआ

विश्वास बताते हैं कि विमान हादसे से बच जाना उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी घटना थी, लेकिन असली मुश्किल उसके बाद शुरू हुई। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब वह घर लौटे, तो उनकी दुनिया पूरी तरह बदल चुकी थी। शारीरिक रूप से वह ठीक थे, लेकिन मानसिक रूप से बेहद परेशान रहने लगे। हादसे की यादें हर समय उनका पीछा करती थीं। उन्हें ऐसा महसूस होता था कि वह उस दर्दनाक पल से कभी बाहर नहीं निकल पाएंगे।

सर्वाइवर गिल्ट ने बढ़ाई परेशानी

विश्वास ने बताया कि हादसे के बाद वह “सर्वाइवर गिल्ट” नाम की मानसिक स्थिति से गुजरने लगे। उन्हें बार-बार यही सवाल परेशान करता था कि जब बाकी यात्री नहीं बच सके, तो वह अकेले कैसे बच गए। रात में उन्हें नींद नहीं आती थी। आंखें बंद करते ही उन्हें यात्रियों की चीखें सुनाई देने लगती थीं। कई बार वह अचानक घबराकर उठ जाते थे। यह मानसिक दबाव धीरे-धीरे उनके जीवन का हिस्सा बन गया।

लोगों के व्यवहार ने पहुंचाया दर्द

विश्वास के अनुसार, सबसे ज्यादा तकलीफ उन्हें कुछ लोगों के व्यवहार से हुई। जहां उन्हें सहारे और समझदारी की जरूरत थी, वहीं कुछ लोग उन्हें अलग नजर से देखने लगे। उन्होंने बताया कि कई लोग उन्हें एक अजीब घटना का हिस्सा मानते थे। कुछ लोग तरह-तरह की बातें करने लगे, जिससे उनका मानसिक तनाव और बढ़ गया। इस तरह की प्रतिक्रियाओं ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया।

थेरेपी की मदद से संभल रहे हैं

आज हादसे को एक साल पूरा हो चुका है। विश्वास अब विशेषज्ञों की सलाह, काउंसलिंग और थेरेपी की मदद से खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि 12 जून उनके लिए सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि जिंदगी का ऐसा अध्याय है जिसे वह चाहकर भी भूल नहीं सकते। हालांकि अब वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि समय के साथ यह दर्द कुछ कम होगा।

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