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Railway Fine Controversy: ग़लती किसकी, ट्रेन हुई लेट,प्लेटफार्म टिकट की समय सीमा हुई खत्म, यात्री को भरना पड़ा भारी जुर्माना

Platform Ticket Fine Controversy: महाराष्ट्र के कल्याण रेलवे स्टेशन पर एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने रेलवे के नियमों और यात्रियों की सुविधाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यहां एक यात्री को केवल इसलिए जुर्माना भरना पड़ा क्योंकि जिस ट्रेन का वह इंतजार कर रहा था, वह कई घंटे देरी से पहुंची। यह मामला आदित्य सिंह चौहान नाम के यात्री से जुड़ा है। आदित्य अपने परिवार को बिहार जाने वाली ट्रेन संख्या 11061, लोकमान्य तिलक टर्मिनस-जयनगर एक्सप्रेस में बैठाने के लिए स्टेशन पहुंचे थे। इस ट्रेन को पवन एक्सप्रेस के नाम से भी जाना जाता है।

समय पर खरीदा था प्लेटफॉर्म टिकट

आदित्य के अनुसार, उन्होंने दोपहर 11:58 बजे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म टिकट खरीदा था। टिकट की कीमत 20 रुपये थी। ट्रेन दोपहर करीब 12:12 बजे आने वाली थी, इसलिए उन्हें लगा कि टिकट की अवधि के भीतर ही काम पूरा हो जाएगा। लेकिन परिचालन कारणों से ट्रेन लगातार लेट होती चली गई। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों को भी ट्रेन के आगमन को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी। देखते ही देखते ट्रेन लगभग 5 से 6 घंटे देर से पहुंची।

टिकट खत्म हुआ और लग गया जुर्माना

लंबे इंतजार के दौरान आदित्य का प्लेटफॉर्म टिकट अपनी तय समय सीमा पार कर गया। जब ट्रेन आखिरकार स्टेशन पहुंची और वह अपने परिवार को विदा करके बाहर निकलने लगे, तब टिकट जांच कर्मचारियों ने उनके दस्तावेज जांचे। जांच में पाया गया कि प्लेटफॉर्म टिकट अब वैध नहीं था। इसके बाद रेलवे नियमों के तहत उन पर करीब 500 से 520 रुपये का जुर्माना लगा दिया गया।

यात्री ने उठाए कई सवाल

आदित्य का कहना है कि अगर उन्हें पहले से पता होता कि ट्रेन इतनी देर से आने वाली है, तो वह नया प्लेटफॉर्म टिकट खरीद लेते। उन्होंने बताया कि परिवार, बच्चों और सामान के साथ बार-बार स्टेशन से बाहर जाकर टिकट लेना आसान नहीं था। उनका मानना है कि जब देरी रेलवे की वजह से हुई, तो ऐसी स्थिति में यात्रियों पर जुर्माना लगाना उचित नहीं कहा जा सकता।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने रेलवे की कार्रवाई को अनुचित बताया और कहा कि यात्री की कोई गलती नहीं थी। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि नियम सभी के लिए समान होते हैं और प्लेटफॉर्म टिकट की वैधता तय समय के अनुसार ही मानी जानी चाहिए।

रेलवे ने क्या कहा?

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की शिकायतों को रेलमदद पोर्टल या हेल्पलाइन 139 के जरिए दर्ज कराया जा सकता है। हालांकि अभी तक जुर्माना वापस लेने या रद्द करने को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

बड़ा सवाल अब भी कायम

यह मामला केवल एक यात्री पर लगे जुर्माने तक सीमित नहीं है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्लेटफॉर्म टिकट की वैधता को ट्रेन की वास्तविक स्थिति और देरी से जोड़ा जाना चाहिए? कई लोगों का मानना है कि यदि ट्रेन कई घंटे लेट हो जाए, तो यात्रियों को राहत देने के लिए नियमों में कुछ लचीलापन होना चाहिए। फिलहाल यह मुद्दा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

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