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Pulses Price Rise: पेट्रोल-डीजल के बाद अब दालें भी महंगी, रसोई का बजट बिगड़ा किस दाल में आया सबसे ज्यादा उछाल

Increases Household Burden: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसका असर अब रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर भी दिखाई देने लगा है। खासतौर पर दालों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इससे आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है और घर का खर्च संभालना पहले से ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है।

बढ़े ईंधन के दामों का असर

बीते करीब 15 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई की लागत भी बढ़ गई है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों और ट्रक ऑपरेटरों ने किराए में बढ़ोतरी कर दी है। इसका सीधा असर मंडियों से दुकानों तक पहुंचने वाले खाद्य पदार्थों पर पड़ रहा है। दालों की ढुलाई महंगी होने से उनकी खुदरा कीमतें भी बढ़ गई हैं।

मौसम ने भी बढ़ाई परेशानी

दालों की कीमतें बढ़ने की एक बड़ी वजह मौसम भी है। बेमौसम बारिश और अल-नीनो के प्रभाव से देश के कई प्रमुख उत्पादक राज्यों में उड़द और अरहर की फसल को नुकसान पहुंचा है। उत्पादन कम होने की आशंका के कारण बाजार में दालों की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।

आयात हुआ महंगा

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में आ रही चुनौतियों के कारण दालों का आयात महंगा हो गया है। आयात लागत बढ़ने का असर सीधे घरेलू बाजार में दिखाई दे रहा है और उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।

बाजार में दालों के मौजूदा भाव

वर्तमान में विभिन्न दालों की खुदरा कीमतों में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। अरहर दाल 115 से 150 रुपये प्रति किलो, उड़द दाल 110 से 140 रुपये प्रति किलो, मूंग दाल 95 से 130 रुपये प्रति किलो, मसूर दाल 85 से 110 रुपये प्रति किलो और चना दाल 80 से 95 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।

अरहर दाल में सबसे ज्यादा उछाल

थोक बाजार में सबसे अधिक तेजी अरहर दाल में दर्ज की गई है। व्यापारियों के अनुसार अरहर दाल के दाम करीब 12 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। थोक बाजार में इसका भाव 9,000 से 12,250 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश की मंडियों में इसका औसत भाव लगभग 10,440 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं, सिलीगुड़ी जैसी प्रमुख मंडियों में कीमतें 11,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं।

क्यों सबसे ज्यादा महंगी हुई अरहर?

भारत अरहर दाल की मांग पूरी करने के लिए म्यांमार और कई अफ्रीकी देशों से बड़े पैमाने पर आयात करता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री मालभाड़ा काफी बढ़ गया है। जहाजों के जरिए आने वाला माल पहले की तुलना में ज्यादा खर्चीला हो गया है। इसी वजह से विदेशों से आने वाली अरहर दाल महंगी पड़ रही है और इसका असर घरेलू बाजार की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।

आगे क्या हो सकती है स्थिति?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन की कीमतों में राहत नहीं मिली और आयात लागत ऊंची बनी रही, तो आने वाले दिनों में दालों के दाम और बढ़ सकते हैं। ऐसे में आम उपभोक्ताओं को रसोई का बजट संभालने के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।

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