Sharad Pawar Strategy: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के प्रमुख शरद पवार एक बार फिर अपनी राजनीतिक रणनीति को लेकर सुर्खियों में हैं। मंगलवार को वह जंतर-मंतर पहुंचे और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। इसके ठीक अगले दिन शरद पवार अपनी बेटी और पार्टी की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे। लगातार दो दिनों में हुई इन दोनों मुलाकातों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है।
किस खेमे के करीब हैं पवार?
शरद पवार की इन मुलाकातों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि वह आखिर किस राजनीतिक खेमे के करीब हैं। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन दोनों मुलाकातों को केवल छात्र आंदोलन तक सीमित करके देखना सही नहीं होगा। इसके पीछे परिसीमन बिल को लेकर पवार की संभावित रणनीति भी हो सकती है। उनकी पार्टी ने अभी तक इस मुद्दे पर अपना अंतिम रुख स्पष्ट नहीं किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि पवार विपक्ष और सत्ता पक्ष, दोनों से संवाद बनाए रखकर राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन कर रहे हैं।
रणनीति पर नजर
जंतर-मंतर पहुंचकर शरद पवार ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इसके अगले ही दिन पीएम मोदी से उनकी मुलाकात ने अटकलों को और मजबूत कर दिया। इससे पहले जून में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि एनसीपी (SP) कांग्रेस के साथ विलय को लेकर विचार कर सकती है। वहीं, जुलाई में शरद पवार के एनडीए के करीब जाने की संभावनाओं को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई थीं। फिलहाल पवार की पार्टी के पास लोकसभा में 8 सांसद और महाराष्ट्र विधानसभा में 10 विधायक हैं।
पहले भी दिखा चुके हैं कौशल
शरद पवार के राजनीतिक सफर को देखें तो वह कई बार बदलते समीकरणों के बीच संतुलन साधने के लिए जाने जाते हैं। 2019 में उन्होंने उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के साथ मिलकर विपक्षी गठबंधन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसी दौरान उनके भतीजे अजित पवार के बीजेपी के संपर्क में होने की खबरें भी सामने आई थीं। इसके बाद देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन यह सरकार ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई। इस पूरे घटनाक्रम ने पवार की राजनीतिक रणनीति और उनके फैसले लेने के तरीके को लेकर उनकी अलग पहचान और मजबूत कर दी।
आखिरी फैसला अभी बाकी
परिसीमन बिल पर एनसीपी (SP) का अंतिम रुख अभी भी स्पष्ट नहीं है। शरद पवार के बारे में राजनीतिक हलकों में अक्सर कहा जाता है कि वह किसी भी बड़े फैसले से पहले आखिरी समय तक अपने पत्ते नहीं खोलते। कुछ दिन पहले सुप्रिया सुले ने भी कहा था कि शरद पवार का मानना है कि अगर किसी नेता की चर्चा हो रही है, फिर चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक, तो इसका मतलब है कि उसकी राजनीतिक ताकत अभी कायम है। सुले ने यह भी कहा था कि अगर सरकार कुछ शर्तों के साथ परिसीमन बिल दोबारा लाती है तो उस पर समर्थन देने को लेकर विचार किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने एनडीए के साथ जाने की अटकलों को साफ तौर पर खारिज कर दिया था। ऐसे में पवार की हालिया मुलाकातों को लेकर अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है।
