Pellet Gun Case: सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए संकेत दिया है कि अब इसके उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत यह तय करेगी कि पैलेट गन का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया जा सकता है और कब नहीं। अदालत ने इस संबंध में केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों से जवाब भी मांगा है।
SOP पर कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि पैलेट गन के इस्तेमाल की मौजूदा स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) क्या है और किस आधार पर इसका प्रयोग किया जाता है। कोर्ट ने संकेत दिए कि यदि जरूरत पड़ी तो पूरे देश के लिए एक समान प्रोटोकॉल तैयार किया जाएगा, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
FIR वापस लेने पर टिप्पणी
इसी सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि राज्य सरकारों के पास कानूनी अधिकार है कि वे उपयुक्त मामलों में दर्ज FIR को वापस ले सकती हैं या बंद कर सकती हैं। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर आपराधिक मामलों में इस तरह की राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि कानून का पालन हर स्थिति में जरूरी है और गंभीर अपराधों को सामान्य विरोध-प्रदर्शन से अलग देखा जाएगा।
बल प्रयोग पर भी सवाल
अदालत ने यह भी कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग किया गया है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि कानून लागू करने के नाम पर अनावश्यक बल प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां अपना पक्ष रखेंगी। इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर देशभर में एक समान दिशा-निर्देश लागू किए जाएं या नहीं। इस मामले पर कोर्ट का फैसला भविष्य में पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।









