Swami Ramdev Statement:हरिद्वार में योग गुरु स्वामी रामदेव ने देश के कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। श्रीजी वाटिका में आयोजित ‘एक देश, एक चुनाव’ कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने एससी-एसटी और ब्राह्मण समाज के सम्मान को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह एससी-एसटी वर्ग का अपमान संविधान के खिलाफ है, उसी तरह ब्राह्मणों का अपमान भी संविधान के खिलाफ माना जाना चाहिए।
कंगना विवाद पर जवाब
स्वामी रामदेव ने भाजपा सांसद कंगना रनौत से जुड़े विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश के लोग जानते हैं कि स्वामी रामदेव कौन हैं और उन्होंने देश के लिए क्या योगदान दिया है। इसलिए वह ऐसे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने साफ किया कि वह इस विवाद को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। दरअसल, पिछले दिनों कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बाबा रामदेव पर निशाना साधा था, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद चर्चा में आ गया था।
चुनाव पर समर्थन
स्वामी रामदेव ने ‘एक देश, एक चुनाव’ की व्यवस्था का खुलकर समर्थन किया। उनका कहना है कि बार-बार चुनाव होने से देश की शिक्षा व्यवस्था समेत कई क्षेत्रों पर असर पड़ता है। चुनावी ड्यूटी में शिक्षकों की तैनाती के कारण उनका काफी समय इसी प्रक्रिया में चला जाता है। उन्होंने कहा कि अगर देश में एक साथ चुनाव होते हैं तो शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और विकास की गति बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
विकास पर जोर
देश के विकास को लेकर स्वामी रामदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य 2047 का जरूर है, लेकिन उनकी इच्छा है कि भारत 2040 तक ही विकसित राष्ट्र बन जाए। उन्होंने राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर देशहित को रखने की जरूरत बताई। साथ ही कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र जैसे क्षेत्रों में लगातार सुधार होना चाहिए और देश को विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
आंदोलनों पर सवाल
स्वामी रामदेव ने विरोध-प्रदर्शनों में छोटे बच्चों को शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को सड़क या संसद में हंगामा करके बंधक नहीं बनाया जा सकता। उनका आरोप है कि कुछ आंदोलनों में पांच, सात और दस साल तक के बच्चों को भी आगे किया जाता है और उनसे पुलिस थानों, एसपी या जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों के घेराव जैसे काम करवाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन नाबालिग बच्चों को आंदोलनों में आगे नहीं करना चाहिए।
वंदे मातरम् पर राय
‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी विवाद पर भी रामदेव ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत माता हमारे लिए आस्था, ज्ञान, शक्ति और सुरक्षा का केंद्र हैं। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ का विरोध करने वालों को भारतीय संस्कृति और संस्कृत को बेहतर तरीके से समझने की सलाह दी। उनका कहना था कि इसके अर्थ और सांस्कृतिक संदर्भ को समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन जरूरी है। उन्होंने भारत माता को अपनी आस्था, कर्तव्य, उद्देश्य और मंजिल का केंद्र बताया।
