नई दिल्ली ऑनलाइन डेस्क। केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पेश करने जा रही है। जिसको लेकर देश की सियासत गर्म है। एक वर्ग इसे खास समुदाय के खिलाफ बता रहा है तो एक ऐसा भी वर्ग है, जो इस बिल का समर्थन कर रहा है। एनडीए के घटक दलों की तरफ से इस बिल (Waqf Amendment Bill) के पक्ष में समर्थन के ऐलान से बीजेपी गदगद हैं तो ‘इंडिया ब्लॉक’ के नेता बिल को किसी भी कीमत पर पास नहीं होने देने को लेकर एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। … तो ऐसे में हम अपने इस खास अंक में वक्फ के इतिहास और आज तक पूरे घटनाक्रम के बारे में आपको रूबरू कराने जा रहे हैं।
लोकसभा में पेश होगा वक्फ बोर्ड संशोधन बिल
लोकसभा में मंगलवार को वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पेश किया जाएगा। बिल पर संसद में आठ घंटे तक चर्चा होगी। बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को लोकसभा में मौजूद रहने को कहा है। वहीं एनडीए के सभी सहयोगी दल इस बिल के पक्ष में मतदान करेंगे। ऐसे में बीजेपी को उम्मीउद है कि वक्फ बोर्ड संशोधन बिल लोकसभा से आसानी से पास हो गया। दरअसल, संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त 2024 को ये बिल लोकसभा में पेश किया था, जिसे विपक्ष के हंगामे के बाद संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था। संसदीय समिति में कुल 44 संशोधन पेश किए गए, जिसमें करीब 14 संशोधन जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली जेपीसी ने स्वीकार कर लिए। संशोधित बिल को कैबिनेट ने पहले ही मंजूरी दे दी है। अब यह बिल आज पेश होने वाला है।
पहले जानें क्या है वक्फ
जानकार बताते हैं कि वक्फ अरबी भाषा से निकला शब्द है, जिसका ओरिजिन ’वकुफा’ शब्द से हुआ है। वकुफा का अर्थ होता है ठहरना, रोकना। इसी से बना वक्फ, जिसका अर्थ होता है संरक्षित करना। जानकारों के मुताबिक, इस्लाम में वक्फ का अर्थ उस संपत्ति से है, जो जन-कल्याण के लिए हो। यह एक तरीके (Waqf Amendment Bill) का ’दान’ जैसा ही होता है और इसका दानदाता चल या अचल संपत्ति दान कर सकता है। जन कल्याण के लिए जो भी दान कर दिया जाए, उसे संरक्षित करना ही वक्फ है। जानकार बताते हैं कि अब इसमें घर, खेत, जमीन-मैदान ही शामिल नहीं है, बल्कि पंखा, कूलर, साइकिल, टीवी-फ्रिज भी आ सकते हैं। शर्त यही है कि, इसे जनकल्याण की मकसद से दान किया गया हो।
उमर ने खैबर में एक जमीन हासिल की और
मुस्लिम जानकार बताते हैं एक बार खलीफा उमर ने खैबर में एक जमीन हासिल की और पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से पूछा कि इसका सबसे अच्छा और बेहतरीन प्रयोग कैसे किया जा सकता है?। पैगंबर ने कहा, ‘इस संपत्ति को रोक लो, इसके बांध लो और इससे होने वाले फायदे को लोगों (Waqf Amendment Bill) के काम में लगाओ, उनकी जरूरतों पर खर्च करो। इसे न बेचा जाए, न उपहार में दिया जाए और न ही इसे विरासत में दिया जाए। इस तरह उस जमीन को वक्फ किया गया। पैगंबर मोहम्मद साहब के समय की ऐसी ही एक घटना और सामने आती है, जब 600 खजूर के पेड़ों के एक बाग को वक्फ किया गया था और इससे होने वाली आमदनी से मदीना के गरीब लोगों की मदद की जाती थी। ये वक्फ के सबसे पहले उदाहरणों में से एक है।
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मोहम्मद गौरी ने की थी वक्फ की शुरूआत
जानकार बताते हैं कि वक्फ की भारत में शुरुआत 12वीं सदी के अंत में अविभाजित भारत के पंजाब के मुल्तान में हुई, और दिल्ली में राज करने वाले सुल्तानों के शासनकाल में यह फैली। 12वीं शताब्दी के आखिर में पृथ्वीराज चौहान से जीतने के बाद मोहम्मद गौरी ने सैन्य ताकत और इस्लामिक संस्थानों को बढ़ाकर अपनी सत्ता मजबूत करने की कोशिश की थी। मोहम्मद गौरी ने मुसलमानों की शिक्षा और उनकी इबादत के लिए मुल्तान की जामा मस्जिद के लिए दो गांव दान में दिए थे। भारत में इसको वक्फ के पहले उदाहरण में से एक माना जाता है। जानकार बताते हैं कि भारत में वक्फ की शुरूआत तभी से हुई थी। हालांकि इसको लेकर इतिहासकारों की अगल-अलग राय है। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि भारत में वक्फ का आगाज सैकड़ों साल पहले हो गया था।
कुतुबुद्दीन ऐबक की भी नाम
भारत में दिल्ली सल्तनत की शुरुआत कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210) से होती है। ऐबक को ही भारत में इस्लामी शासन की नींव रखने वाला पहला शासक माना जाता है। उसके शासनकाल में और उसके बाद इल्तुतमिश (1211-1236) जैसे शासकों ने मस्जिदों, मदरसों और अन्य धर्मार्थ कार्यों के लिए संपत्तियों को समर्पित करने की प्रथा को बढ़ावा दिया, जो वक्फ के शुरुआती रूप थे। हालांकि, ऐतिहासिक दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा गया कि वक्फ को ’लागू’ करने वाला पहला शासक कौन था, लेकिन इल्तुतमिश के शासन में इस्लामी कानूनों और परंपराओं को व्यवस्थित करने का कार्य शुरू हुआ, जिसमें वक्फ भी शामिल था।
इन मुगलों ने भी वक्फ को संवारा
मुगल काल में, बाबर (1526-1530) और बाद में अकबर (1556-1605) ने वक्फ को और संगठित रूप दिया। अकबर ने अपने शासनकाल में धर्मार्थ कार्यों और भूमि अनुदानों के लिए वक्फ को प्रोत्साहन दिया, जिससे यह प्रथा व्यापक रूप से प्रचलित हुई। इसलिए, अगर हमें एक शासक का नाम लेना हो, तो इल्तुतमिश को भारत में वक्फ जैसी इस्लामी परंपराओं (Waqf Amendment Bill) को स्थापित करने में शुरुआती योगदानकर्ता माना जा सकता है, हालांकि यह प्रथा धीरे-धीरे विकसित हुई थी और बिल्कुल शुरुआत में इसका नाम वक्फ ही रहा हो, ऐसा कह भी नहीं सकते, लेकिन ऐसी संपत्तियां जिस मद में दान की जातीं, वह तरीका वक्फ ही था।
अंग्रेजों के शासन में बना कानून
जानकार बताते हैं कि वक्फ बोर्ड को औपचारिक रूप से ब्रिटिश सरकार ने 1913 में शुरू किया था। इसके बाद 1923 में वक्फ एक्ट बनाया गया, जिसने इसे कानूनी आधार दिया। लेकिन इससे पहले भी यह प्रथा व्यक्तिगत स्तर पर मौजूद थी। लोग अपनी संपत्ति को गरीबों की मदद, शिक्षा और धार्मिक कार्यों के लिए छोड़ जाते थे। उनके अनुसार, उस समय जमींदारों और नवाबों के पास अतिरिक्त संपत्तियां होती थीं, जिन्हें वे समाज के हित के लिए दान कर देते थे। जानकार बताते हैं कि समय-समय पर इसमें संशोधन हुए।