Noida Sport City Scam: नोएडा स्पोर्ट्स सिटी महाघोटाले की सीबीआई जांच होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस घोटाले में शामिल नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई को जांच का जिम्मा सौंपा है। नौ हजार करोड़ के इस भूमि घोटाले में कई बड़े अधिकारी और बिल्डर जांच के दायरे में आएंगे।
बसपा-सपा सरकार में हुआ था घोटाला
नोएडा प्राधिकरण ने 2010 से 2015 के बीच स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के लिए 32 लाख 30 हजार 500 वर्ग मीटर भूमि चार बिल्डरों को आवंटित की थी। नियमों के अनुसार, इस भूमि का 70% हिस्सा खेल सुविधाओं के लिए, 28% आवासीय परियोजनाओं के लिए और 2% व्यावसायिक उपयोग के लिए होना था। साथ ही, भूमि का विभाजन और बिक्री निषिद्ध था।
हालांकि, बिल्डरों ने नियमों को ताक पर रखते हुए इस भूमि को 84 टुकड़ों में बांटा और भारी मुनाफे के लिए अन्य बिल्डरों को बेच दिया। इन बिल्डरों ने स्पोर्ट्स सिटी के बजाय ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बना दिए, जिसे प्राधिकरण ने मंजूरी भी दे दी।
कैग रिपोर्ट में सामने आई गड़बड़ी
इस परियोजना में हुए घोटाले का खुलासा कैग (CAG) की जांच में हुआ। रिपोर्ट में सामने आया कि बिल्डरों ने आवंटन की शर्तों के अनुसार बकाया राशि भी जमा नहीं की, जो अब करीब 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। कैग की आपत्ति के बाद नोएडा प्राधिकरण ने संपत्तियों की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी। जब बिल्डर राहत के लिए हाईकोर्ट पहुंचे, तो कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद इस घोटाले का पर्दाफाश कर दिया।
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किन बिल्डरों को आवंटित हुई थी जमीन?
थ्रीसी ग्रीन डेवलपर: 7,27,500 वर्ग मीटर भूमि, 16 हिस्सों में बांटी, 12 अन्य बिल्डरों को बेची।
लॉजिक्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड: 8,00,000 वर्ग मीटर भूमि, 24 हिस्सों में बांटी, 24 अन्य बिल्डरों को बेची।
एटीएस होम्स प्राइवेट लिमिटेड: 5,03,000 वर्ग मीटर भूमि, 10 हिस्सों में बांटी, 9 अन्य बिल्डरों को बेची।
थ्रीसी ग्रीन डेवलपर्स स्पोर्ट्स सिटी एससी: 12,00,000 वर्ग मीटर भूमि, 24 हिस्सों में बांटी, 17 अन्य बिल्डरों को बेची।
कोर्ट ने जारी किया आदेश
सीबीआई नोएडा प्राधिकरण (Noida Sport City Scam) के अधिकारियों और बिल्डरों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच करे। दोषियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और बकाएदारों से ब्याज सहित वसूली के लिए प्राधिकरण नोटिस जारी करे। निर्धारित समय में पैसा न मिलने पर आवंटन रद्द कर मार्केट रेट पर नया आवंटन किया जाए और आवंटी अगर लीज डीड और नियमों का पालन नहीं कर रहे तो उनकी संपत्तियां जब्त की जाएं। इस घोटाले की परतें खुलने के बाद प्रदेश के कई बड़े अधिकारियों और सफेदपोशों पर गाज गिर सकती है। अब सबकी नजरें सीबीआई जांच पर टिकी हैं।