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Jagannath Rath Yatra 2026: महाप्रभु के स्वागत को तैयार श्रीगुंडिचा मंदिर, इस प्राचीन कला से सजा पूरा परिसर

विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा 2026 के लिए पुरी का श्रीगुंडिचा मंदिर पूरी तरह सजकर तैयार हो गया है। 16 जुलाई से शुरू होने वाली रथयात्रा के दौरान भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने-अपने रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से श्रीगुंडिचा मंदिर पहुंचेंगे, जहां वे सात दिनों तक विराजमान रहेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीगुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ का जन्मस्थल माना जाता है।

झोटी-चिता कला से सजाया गया मंदिर

श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक अरविंद कुमार पाढ़ी ने बताया कि रथयात्रा की लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रीमंदिर और श्रीगुंडिचा मंदिर को ओडिशा की पारंपरिक झोटी-चिता लोक कला से सजाया गया है, जिससे दोनों मंदिरों की भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण और भी आकर्षक हो गया है। मंदिर परिसर में विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य भी अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष जोर

रथयात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए ओडिशा सरकार और मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था को मजबूत किया है। प्रशासन का लक्ष्य है कि पूरा आयोजन सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न हो।

सेवायत निभाएंगे पारंपरिक जिम्मेदारी

दइतापति सेवायत हर प्रसाद दास महापात्र ने बताया कि वे हर वर्ष अपनी पैतृक सेवा निभाने के लिए बेंगलुरु से पुरी लौटते हैं। उन्होंने कहा कि स्नान पूर्णिमा से लेकर नीलाद्रि बीजे तक सभी सेवायत कठोर धार्मिक अनुशासन का पालन करते हैं और केवल सात्विक हविष्य अन्न ग्रहण करते हैं।

सात दिन श्रीगुंडिचा मंदिर में रहेंगे महाप्रभु

रथयात्रा के दौरान तीनों विग्रह सात दिनों तक श्रीगुंडिचा मंदिर में विराजमान रहेंगे। इसके बाद बाहुड़ा यात्रा के माध्यम से पुनः श्रीजगन्नाथ मंदिर लौटेंगे। मंदिर प्रशासन और सेवायतों का विश्वास है कि महाप्रभु की कृपा से इस वर्ष की रथयात्रा भी भव्य, सुरक्षित और ऐतिहासिक होगी।

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