Chaitra Navrat: चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही देशभर में भक्तिभाव का माहौल बन जाता है। नवरात्रि के नौ दिन देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना के लिए बेहद खास माने जाते हैं। इस दौरान श्रद्धालु व्रत रखते हैं, सात्विक भोजन करते हैं और अपने रहन-सहन में भी कई नियमों का पालन करते हैं। इन्हीं नियमों में से एक है नवरात्रि के दौरान बाल और नाखून न काटना। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर इसके पीछे क्या कारण हैं।
धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि जैसे पवित्र समय में व्यक्ति की मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा अधिक सक्रिय और सकारात्मक होती है। माना जाता है कि बाल और नाखून शरीर की ऊर्जा से जुड़े होते हैं। ऐसे में इस दौरान इन्हें काटना शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि इससे सकारात्मक ऊर्जा में कमी आ सकती है। यही वजह है कि कई लोग इन दिनों शेविंग या हेयरकट करवाने से भी परहेज करते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि बाल और नाखून व्यक्ति के डीएनए से जुड़े होते हैं, इसलिए इन्हें शरीर की ऊर्जा से जोड़ा जाता है। हालांकि वैज्ञानिक रूप से इन दावों की स्पष्ट पुष्टि नहीं होती, लेकिन परंपराओं और आस्था के कारण लोग इन नियमों का पालन करना उचित समझते हैं। नवरात्रि के दौरान खान-पान और दिनचर्या में संयम रखने का मुख्य उद्देश्य मन और शरीर को शुद्ध रखना माना जाता है। 🌼
क्या बाल कटवाने से दूर हो सकती है नकारात्मकता?
कई लोग यह भी मानते हैं कि जब व्यक्ति मानसिक रूप से तनाव या नकारात्मकता महसूस कर रहा हो, तब हेयरकट करवाना फायदेमंद हो सकता है। नया लुक व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और मानसिक रूप से हल्कापन महसूस कराने में मदद करता है। व्यक्तित्व में छोटा बदलाव भी मूड पर सकारात्मक असर डाल सकता है। ✨
आस्था और परंपरा का सम्मान करना है जरूरी
कुल मिलाकर नवरात्रि के दौरान बाल न काटने की परंपरा आस्था और सांस्कृतिक विश्वासों से जुड़ी हुई है। ऐसे में यह पूरी तरह व्यक्ति की श्रद्धा और मान्यता पर निर्भर करता है कि वह इन नियमों का पालन किस तरह करता है। इस पावन अवसर पर सकारात्मक सोच, सात्विक जीवनशैली और आत्मसंयम को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है








