हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार पद्मिनी एकादशी की तिथि मंगलवार सुबह 5 बजकर 10 मिनट से शुरू हुई है। यह तिथि 27 मई बुधवार शाम 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर पद्मिनी एकादशी का व्रत बुधवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
मान्यता है कि पद्मिनी एकादशी पर कुछ खास चीजों का दान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और घर में खुशहाली आती है। आइए जानते हैं इस दिन किन चीजों का दान करना शुभ माना गया है।
अन्न का दान सबसे बड़ा पुण्य
पद्मिनी एकादशी के दिन जरूरतमंद लोगों या ब्राह्मणों को अन्न दान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है। आप गेहूं, चावल, दाल या आटा दान कर सकते हैं। हालांकि एकादशी के दिन चावल खाने की मनाही होती है, लेकिन इसका दान करना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि अन्न दान करने से घर में कभी भी खाने-पीने की कमी नहीं रहती और मां अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है।
जल और शर्बत का दान करें
गर्मी के मौसम में पानी का दान बहुत बड़ा पुण्य माना जाता है। पद्मिनी एकादशी के दिन राहगीरों को ठंडा पानी या शर्बत पिलाना शुभ माना गया है।आप प्याऊ लगवा सकते हैं या मिट्टी के घड़े का दान भी कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जल दान करने से पितृ दोष शांत होता है और मन को शांति मिलती है।
जरूरतमंदों को दें वस्त्र
इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को नए और साफ कपड़े दान करना भी बहुत शुभ माना गया है। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार पीले कपड़े, धोती, गमछा या अन्य वस्त्र दान कर सकते हैं। ध्यान रखें कि फटे या पुराने कपड़े दान नहीं करने चाहिए।
तिल और गुड़ का महत्व
पद्मिनी एकादशी पर तिल और गुड़ का दान भी विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन की परेशानियां कम होती हैं और स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है। कई लोग इस दिन तिल और गुड़ से बनी चीजों का दान भी करते हैं।
पीले फल और मिठाई का दान
भगवान विष्णु को पीला रंग बेहद प्रिय माना जाता है। इसलिए इस दिन पीले रंग की चीजों का दान करना खास शुभ फल देता है। आप केले, आम, पपीता या बेसन के लड्डू जैसी पीली मिठाइयों का दान कर सकते हैं। मान्यता है कि इससे कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है और मान-सम्मान में बढ़ोतरी होती है।
डिस्क्लेमर:इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। इसकी पूर्ण सत्यता का दावा नहीं किया जाता। किसी भी विशेष जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

