Skanda Sashti 2026 : वैदिक पंचांग के अनुसार हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को Skanda Sashti मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र Lord Kartikeya को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
स्कंद षष्ठी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार अधिक मास की स्कंद षष्ठी 21 मई 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।
- षष्ठी तिथि प्रारंभ: 21 मई सुबह 08:26 बजे
- षष्ठी तिथि समाप्त: 22 मई सुबह 06:24 बजे
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:05 बजे से 04:46 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:35 बजे से 03:29 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:07 बजे से 07:28 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:57 बजे से 02:49 बजे तक
- अमृत काल: रात 08:47 बजे से 10:18 बजे तक
पूजा का शुभ समय
हिंदू धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व माना गया है। ऐसे में स्कंद षष्ठी का व्रत 21 मई को रखा जाएगा। इस दिन सुबह 08:26 बजे के बाद षष्ठी तिथि लगने पर भगवान कार्तिकेय की पूजा की जा सकती है।
स्कंद षष्ठी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार जो दंपत्ति संतान सुख की कामना करते हैं, उनके लिए यह व्रत बेहद फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से योग्य संतान की प्राप्ति होती है और बच्चों की लंबी आयु तथा सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
इसके अलावा यह व्रत जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर करने और साहस, आत्मविश्वास तथा सकारात्मकता बढ़ाने वाला भी माना जाता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें।
- भगवान कार्तिकेय को चंदन, अक्षत, कुमकुम और फूल अर्पित करें।
- पूजा के दौरान दीपक जलाकर आरती करें।
- व्रत के दिन सात्विक भोजन करें और मन को शांत रखें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया स्कंद षष्ठी व्रत शुभ फल देने वाला माना जाता है।
