Vastu Tips: हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में घर को केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि एक जीवित इकाई माना गया है जो हमारी भावनाओं और भाग्य को प्रभावित करती है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका ‘मुख्य द्वार’ की होती है। माना जाता है कि इसी मार्ग से देवी लक्ष्मी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। यदि प्रवेश द्वार ही वास्तु दोष से घिरा हो, तो घर में दरिद्रता और अशांति का वास होने लगता है। अक्सर हम सजावट के नाम पर कुछ ऐसी तस्वीरें लगा देते हैं जो अनजाने में ही हमारे जीवन में नकारात्मकता का जहर घोल देती हैं।
इन तस्वीरों से आज ही बना लें दूरी
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य द्वार पर हिंसक या आक्रामक तस्वीरें कभी नहीं लगानी चाहिए। युद्ध, लड़ाई, शिकार या जंगली जानवरों के चित्र घर के सदस्यों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन और आपसी कलह बढ़ाते हैं। इसके अलावा, डूबते हुए सूरज, उजड़े हुए मकान या सूखे पेड़ों की तस्वीरें भी अशुभ मानी जाती हैं क्योंकि ये जीवन में ठहराव और निराशा का प्रतीक हैं। उदास चेहरे या अकेलेपन को दर्शाने वाली कलाकृतियां घर के माहौल में अवसाद (Depression) पैदा कर सकती हैं। गहरे और डरावने रंगों, जैसे काला या गहरा नीला, के अत्यधिक प्रयोग वाली तस्वीरों से भी बचना चाहिए, क्योंकि ये राहु के प्रभाव को बढ़ा सकती हैं।
द्वार पर क्या लगाना होता है अत्यंत शुभ?
घर में सुख-समृद्धि के द्वार खोलने के लिए प्रवेश द्वार पर मांगलिक प्रतीकों का होना अनिवार्य है। मुख्य द्वार के ठीक ऊपर ‘स्वास्तिक’ या ‘ॐ’ का चिह्न बनाना अत्यंत फलदायी होता है। इसके साथ ही, भगवान गणेश की बैठी हुई प्रतिमा या तस्वीर लगाना शुभ माना जाता है, लेकिन ध्यान रहे कि उनकी पीठ घर के बाहर की ओर हो। यदि आप प्राकृतिक दृश्यों के शौकीन हैं, तो बहते हुए झरने या उगते हुए सूर्य की तस्वीर लगा सकते हैं, जो जीवन में निरंतर गतिशीलता और उन्नति का संचार करती है।
रखरखाव और ऊर्जा का प्रवाह
तस्वीरों के अलावा द्वार की स्वच्छता पर ध्यान देना भी आवश्यक है। मुख्य दरवाजे के पीछे जूते-चप्पल का ढेर या कचरा जमा होना धन के आगमन को रोकता है। द्वार के सामने कोई भारी फर्नीचर या बाधा नहीं होनी चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा निर्बाध रूप से घर के भीतर आ सके। शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाना या अच्छी रोशनी रखना घर की ‘वाइब्स’ को बेहतर बनाता है।







