West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल अचानक बदलता नजर आ रहा है। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के सक्रिय प्रचार से दूर होने के बाद अब कांग्रेस ने पूरी ताकत से मैदान संभाल लिया है। कांग्रेस नेता शुभंकर सरकार ने एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुल रज्जाक मोल्ला को वोट देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ असली लड़ाई कांग्रेस लड़ रही है और फलता के लोगों को कांग्रेस का समर्थन करना चाहिए। शुभंकर सरकार ने तृणमूल के कार्यकर्ताओं और समर्थकों से भी कांग्रेस के साथ आने की बात कही। उनका कहना है कि राज्य में भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी वोटों का एकजुट होना जरूरी है।
तृणमूल नेतृत्व पर लगाए आरोप
शुभंकर सरकार ने अपने बयान में तृणमूल नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी के कई पुराने समर्थकों ने लंबे समय तक दबाव और परेशानी झेली है। उनका आरोप है कि पार्टी नेतृत्व ने कई बार कार्यकर्ताओं को गलत दिशा में धकेला।
उन्होंने कहा कि बंगाल के विकास और भाजपा विरोधी राजनीति को मजबूत करने के लिए कांग्रेस उम्मीदवार को विधानसभा भेजना जरूरी है। उनके मुताबिक राज्य की राजनीति में अब बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है और लोग नए विकल्प की तलाश कर रहे हैं।
जहांगीर खान फिर चर्चा में
फलता क्षेत्र के चर्चित नेता Jahangir Khan एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। उन्हें इलाके का दबंग नेता माना जाता है और पिछले विधानसभा चुनाव से ही उनका नाम लगातार विवादों में रहा है। चुनाव आयोग ने क्षेत्र में निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश के चर्चित पुलिस अधिकारी Ajay Pal Sharma को विशेष पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया था। मतदान के दौरान उनकी मौजूदगी को काफी अहम माना गया।
29 अप्रैल को मतदान के दिन जहांगीर खान ने पुलिस की चेतावनी के बावजूद फिल्मी अंदाज में कहा था, “पुष्पा झुकेगा नहीं।” उनका यह बयान काफी चर्चा में रहा और सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ।
बदले हालात में पीछे हटे नेता
हालांकि अब राज्य की बदलती राजनीतिक स्थिति और भाजपा के बढ़ते प्रभाव के बीच जहांगीर खान ने खुद को चुनावी मुकाबले से अलग कर लिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका यह फैसला आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत हो सकता है।
इस बीच जहांगीर खान के खिलाफ कई मामले भी दर्ज हुए हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। इन मामलों को लेकर राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा
फलता सीट को लेकर अब राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। माना जा रहा है कि चुनावी लड़ाई पूरी तरह शुरू होने से पहले ही तृणमूल के चर्चित नेता का पीछे हटना पार्टी के अंदरूनी हालात की तरफ इशारा करता है।
कांग्रेस इस मौके को अपने लिए बड़ा राजनीतिक अवसर मान रही है। वहीं भाजपा भी क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में फलता का चुनाव बंगाल की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।
