TMC Political Buzz: काबा, मदीना गाने वाली, क्या स्पीकर को भेजे गए पत्र में शामिल, ममता बनर्जी की बढ़ी राजनीतिक चुनौती

टीएमसी सांसद सयानी घोष का नाम उन नेताओं में शामिल बताया जा रहा है जिन्होंने लोकसभा स्पीकर को अलग बैठने की व्यवस्था की मांग वाला पत्र सौंपा है। इससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।

Sayani Ghosh In Spotlight: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल बढ़ गई, जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेजे गए एक पत्र पर तृणमूल कांग्रेस की सांसद सयानी घोष के भी हस्ताक्षर हैं। इस खबर ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि इस पत्र में संसद के भीतर अलग व्यवस्था की मांग की गई है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो इसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा सकता है।

कौन हैं सयानी घोष?

सयानी घोष एक अभिनेत्री, गायिका और राजनेता हैं। वह वर्तमान में जाधवपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने बांग्ला फिल्म और मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनाई थी।

तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा। पार्टी में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी दी गईं।

काबा-मदीना गीत से मिली पहचान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सयानी घोष काफी चर्चा में आई थीं। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान एक लोकगीत गाया था, जिसकी पंक्तियां थीं, “हृदय मा छे काबा, नयने मदीना।” इस गीत के बाद वह राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई थीं।

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस गीत को लेकर उनकी आलोचना की थी और इसे विवादित बताया था। हालांकि टीएमसी नेताओं ने उनका समर्थन किया था।

राघव चड्ढा पर बयान से भी मचा था विवाद

सयानी घोष का एक बयान भी काफी चर्चा में रहा था। एक पत्रकार ने उनसे उनकी राजनीतिक ऊर्जा की तुलना राघव चड्ढा से की थी। इस पर दिए गए उनके जवाब को लेकर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।

उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर कई दिनों तक बहस चली थी। हालांकि बाद में यह मामला धीरे-धीरे शांत हो गया।

राजनीति में कैसे हुई शुरुआत?

सयानी घोष ने साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। पार्टी ने उन्हें आसनसोल सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह चुनाव जीत नहीं सकीं।

इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा बनाए रखा। बाद में उन्हें युवा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई और वह पार्टी की प्रमुख युवा नेताओं में शामिल हो गईं।

गिरफ्तारी और पूछताछ भी रही चर्चा में

साल 2021 में त्रिपुरा के स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उन पर चुनावी कार्यक्रम के दौरान नारेबाजी करने का आरोप लगा था।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के कथित भर्ती घोटाले की जांच के दौरान भी उनसे कई घंटों तक पूछताछ की गई थी। हालांकि उन्होंने किसी भी तरह की गलत भूमिका से इनकार किया था।

सांसद बनने के बाद बढ़ा कद

साल 2024 के लोकसभा चुनाव में सयानी घोष ने जाधवपुर सीट से जीत दर्ज की और संसद पहुंचीं। इसके बाद वह टीएमसी की प्रमुख महिला नेताओं में गिनी जाने लगीं।

टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तिदार का दावा है कि करीब 20 सांसद एनडीए के समर्थन में अलग रुख रखने के पक्ष में हैं। इसी संबंध में लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है, जिसमें सयानी घोष का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। हालांकि इस मामले पर अभी राजनीतिक बहस जारी है।

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