बिहार में इन दिनों एनकाउंटर को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के “जाति पूछकर गोली चलाओ” वाले बयान के बाद राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है। विपक्ष लगातार सरकार पर हमला बोल रहा है, जबकि बीजेपी नेताओं और पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन किया है। यह विवाद तब और बढ़ गया, जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में जाति देखकर एनकाउंटर किए जा रहे हैं। इसी आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए सम्राट चौधरी ने तंज भरे अंदाज में कहा था कि अब पुलिस से कह देंगे कि पहले जाति पूछो, फिर गोली चलाओ।
बीजेपी नेताओं ने किया समर्थन
बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि बिहार में जो भी अपराध करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने साफ कहा कि अपराधी किसी भी जाति का हो, कानून अपना काम करेगा।
वहीं बीजेपी प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि अपराधियों को जातीय नजरिए से देखना खतरनाक सोच है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपराधियों को बचाने के लिए जाति की राजनीति कर रहे हैं। बीजेपी का कहना है कि राज्य में अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।
खेसारी लाल यादव ने भी दी प्रतिक्रिया
भोजपुरी अभिनेता और गायक खेसारी लाल यादव ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अपराधी की पहचान उसके अपराध से होनी चाहिए, न कि उसकी जाति से। खेसारी ने कहा कि किसी भी अपराध को जातीय नजरिए से नहीं देखना चाहिए और कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए।
उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग कानून व्यवस्था को लेकर सरकार के पक्ष में दिखाई दिए, तो कई लोगों ने विपक्ष के सवालों को भी सही बताया।
पुलिस ने दी सफाई
अपर पुलिस महानिदेशक (विधि व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने भी पूरे मामले पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि बिहार पुलिस किसी की जाति देखकर कार्रवाई नहीं करती। पुलिस सिर्फ कानून के अनुसार काम करती है। उन्होंने बताया कि जब अपराधी पुलिस पर हमला करते हैं या पुलिस की जान को खतरा होता है, तब आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में अपराधियों के खिलाफ अभियान तेज होने के बाद पुलिस टीमों पर हमले बढ़े हैं।
नया विवाद भी आया सामने
इसी बीच मुख्यमंत्री आवास के पास शराब की बोतलें मिलने का मामला भी चर्चा में आ गया है। विपक्ष ने इसे लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद ऐसी घटनाएं सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।
अब बिहार में कानून व्यवस्था, एनकाउंटर और राजनीति तीनों मुद्दे एक साथ चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और ज्यादा बढ़ सकता है।






