Martyr Flight Lieutenant Shubham Kumar: भारतीय वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार असम के जोरहाट में हुए एएन-32 विमान हादसे में शहीद हो गए थे। इस दुर्घटना में देश सेवा के दौरान पांच वायुसेना कर्मियों ने अपनी जान गंवाई थी। शुभम कुमार की शहादत से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई थी।
उनका पार्थिव शरीर पूरे सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव लाया गया, जहां लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। बाद में गयाजी के श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
गांव पहुंचा था पार्थिव शरीर
शुभम कुमार का पार्थिव शरीर जहानाबाद जिले के हुलासगंज प्रखंड स्थित उनके पैतृक गांव बनवरिया पहुंचा था। गांव में बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे।
भारतीय वायुसेना और जिला प्रशासन की मौजूदगी में उन्हें अंतिम सलामी दी गई। पूरे गांव में शहीद के प्रति सम्मान और गर्व का माहौल देखने को मिला।
मुआवजे को लेकर शुरू हुआ विवाद
शहीद अधिकारी के निधन के बाद अब मुआवजे और सरकारी सहायता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परिवार ने सरकार द्वारा श्रेया राय को 21 लाख रुपये का चेक दिए जाने पर सवाल उठाए हैं।
सरकारी स्तर पर हुलासगंज अंचल अधिकारी की ओर से यह चेक श्रेया राय को सौंपा गया। बताया गया कि श्रेया राय उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ की रहने वाली हैं और खुद को शुभम कुमार की पत्नी बता रही हैं।
पिता ने जताई नाराजगी
शुभम कुमार के पिता अमरेंद्र शर्मा का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की शादी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उनके अनुसार, परिवार को कभी यह नहीं बताया गया कि शुभम ने कोर्ट मैरिज की थी।
उन्होंने कहा कि यदि शादी कानूनी रूप से हुई थी, तो श्रेया परिवार की बहू हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि पत्नी होने के नाते उन्हें परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए था और पहले से इस रिश्ते की जानकारी देनी चाहिए थी।
परिवार के मन में कई सवाल
परिवार का कहना है कि शादी की जानकारी न होने के कारण अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी सहायता और अन्य लाभ किस आधार पर दिए गए।
इसी वजह से परिवार इस पूरे मामले में स्पष्ट जानकारी चाहता है। परिजन चाहते हैं कि सभी दस्तावेजों और कानूनी तथ्यों की जांच हो, ताकि किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
चर्चा का विषय बना मामला
शुभम कुमार की शहादत पूरे देश के लिए गर्व की बात है, लेकिन अब मुआवजे को लेकर शुरू हुआ विवाद चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर परिवार सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर कथित पत्नी को सरकारी सहायता मिल चुकी है।
अब सभी की नजर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों पर है कि वे इस मामले में क्या फैसला लेते हैं। आने वाले दिनों में जांच और दस्तावेजों के आधार पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।









