Delhi Metro Revenue: दिल्ली मेट्रो एक घंटे में कितना कमाती है? जानिए टिकट के अलावा कहां से आता है पैसा

दिल्ली मेट्रो रोजाना लाखों यात्रियों को सफर कराती है और DMRC की आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2023-24 में DMRC की कमाई 7,661 करोड़ रुपये से अधिक रही। औसत के हिसाब से मेट्रो एक घंटे में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की आय कर सकती है।

Delhi Metro Revenue:  दिल्ली मेट्रो आज दिल्ली-एनसीआर की परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी है। रोजाना बड़ी संख्या में यात्री मेट्रो से सफर करते हैं। यात्रियों की भारी संख्या के साथ दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन यानी DMRC की आय भी बढ़ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दिल्ली मेट्रो एक घंटे में कितनी कमाई करती है और यह पैसा कहां खर्च होता है।

सालाना आय में हुई बढ़ोतरी

DMRC की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में दिल्ली मेट्रो की कुल आय 7,661 करोड़ रुपये से ज्यादा रही। इससे पिछले वित्त वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा करीब 6,919 करोड़ रुपये था। यानी एक साल में आय में 10 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

सालाना आय को औसत आधार पर देखें तो DMRC की रोजाना आय करीब 21 करोड़ रुपये बैठती है। दिल्ली मेट्रो सामान्य तौर पर सुबह करीब 5 बजे से रात 11:30 बजे तक संचालित होती है। इस आधार पर औसत आय को परिचालन घंटों में बांटने पर मेट्रो की प्रति घंटे की कमाई 1 करोड़ रुपये से अधिक बैठती है। हालांकि, यह एक औसत अनुमान है और वास्तविक आय अलग-अलग दिनों में यात्रियों की संख्या के अनुसार बदल सकती है।

टिकट के अलावा भी होती है कमाई

DMRC की आमदनी सिर्फ टिकट बिक्री पर निर्भर नहीं है। नॉन-फेयर रेवेन्यू भी आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों में विज्ञापन, दुकानों और रेस्टोरेंट के लिए जगह किराए पर देने से भी DMRC को कमाई होती है।

इसके अलावा रियल एस्टेट से जुड़े प्रोजेक्ट और तकनीकी सलाह जैसी कंसल्टेंसी सेवाएं भी आय के स्रोत हैं। टिकट के अलावा इन माध्यमों से होने वाली कमाई DMRC की वित्तीय स्थिति को मजबूत करती है।

कमाई का इस्तेमाल कहां होता है?

DMRC केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की संयुक्त हिस्सेदारी वाला सार्वजनिक उपक्रम है। मेट्रो से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल सबसे पहले संचालन और रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन, सुरक्षा व्यवस्था तथा दूसरे जरूरी खर्चों में किया जाता है। इसके साथ ही नई मेट्रो लाइनों और विस्तार परियोजनाओं पर भी राशि खर्च होती है।

 

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