Delhi PG Incident : मां की मानी एक बात बची हबीब की जान, दोस्तों की तलाश में बेचैन घूम रहे छात्र

सत्य निकेतन में पांच मंजिला छात्र पीजी ढहने से कई लोग मलबे में फंस गए। हबीब मां की सलाह से सुरक्षित बच गए, जबकि नवनीत अपने घर होने के कारण बच निकले, लेकिन दोस्तों की चिंता बनी रही।

 Delhi Satya Niketan PG collapse:दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार दोपहर पांच मंजिला छात्र पीजी की इमारत अचानक ढह गई। करीब 1:30 बजे हुए इस हादसे में कई लोग मलबे में फंस गए। राहत और बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक हादसे में कम से कम पांच लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

जन्मदिन बना जिंदगी

इस हादसे के बीच गाजीपुर के छात्र हबीब की कहानी सामने आई है। हबीब दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं और इसी पीजी में रहते थे। उनका जन्मदिन 4 सितंबर को था। जन्मदिन मनाने के लिए वह बाटला हाउस में रहने वाले अपने चाचा शोएब के घर चले गए।

अगले दिन यानी 5 सितंबर को हबीब ने पीजी लौटने का फैसला किया था। लेकिन उनकी मां ने उन्हें रोक दिया और कहा कि वह रविवार शाम को ही वापस जाएं। हबीब ने मां की बात मान ली। अगले दिन दोपहर उसी पीजी की इमारत भरभराकर गिर गई, जिसमें वह रहते थे। हादसे की खबर मिलने के बाद हबीब को एहसास हुआ कि मां की एक छोटी-सी हिदायत ने उनकी जान बचा ली।

दोस्तों की बढ़ी चिंता

सुरक्षित बचने के बाद भी हबीब पूरी तरह राहत में नहीं थे। पीजी में उनके साथ करीब 12 से 15 लड़के रहते थे। उन्हें लगातार अपने दोस्तों की चिंता सता रही थी। वह फोन और दूसरे माध्यमों से उनकी जानकारी जुटाने की कोशिश करते रहे।

ऐसी ही चिंता मेरठ के छात्र नवनीत गोदारा के सामने भी थी। नवनीत एसआरएसडी कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र हैं और उसी इमारत में रहते थे। जन्माष्टमी के दौरान वह अपने घर चले गए थे, इसलिए हादसे के समय पीजी में मौजूद नहीं थे। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपने दोस्तों की जानकारी जुटाने की अपील की।

रूममेट का फोन बंद

नवनीत के मुताबिक उनके रूममेट अर्पित मध्य प्रदेश के देवास के रहने वाले हैं। हादसे के बाद उनका फोन नहीं लग रहा था। उनके दोस्त अक्षित भी इसी इलाके में रहते थे। अक्षित पीजीडीएवी कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र हैं और मध्य प्रदेश के कटनी के रहने वाले बताए गए हैं। हादसे के बाद उनसे भी संपर्क नहीं हो पा रहा था।

घटनास्थल पर छात्रों और परिजनों की भीड़ जुटी रही। कोई अपने भाई को खोज रहा था तो कोई दोस्त की जानकारी के लिए परेशान था। कई लोग लगातार फोन कर रहे थे। कुछ छात्रों ने मलबे के नीचे से फोन के जरिए मदद मांगने की कोशिश भी की।

इमारत पर उठे सवाल

पीजी में हादसे के समय कितने लोग मौजूद थे, इसकी सही संख्या जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी। शुरुआती जानकारी में 40 से 50 लोगों के होने की आशंका जताई गई, जबकि पीजी की क्षमता करीब 75 बेड तक बताई गई है। कई घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें AIIMS ट्रॉमा सेंटर भी शामिल है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक इमारत में निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा था। उन्होंने बताया कि बेसमेंट में खुदाई के दौरान एक पिलर खिसकने के बाद संरचना ढह गई। हालांकि हादसे की अंतिम वजह जांच के बाद ही सामने आएगी।

इस घटना ने दिल्ली में छात्रों के लिए चल रहे निजी पीजी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इमारतों की स्ट्रक्चरल जांच, बेसमेंट में निर्माण, आपातकालीन निकास और छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच अब जरूरी हो गई है।

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