Fire Tragedy: अस्पताल के पास ठहरना पड़ा भारी, अग्निकांड ने अग्रवाल परिवार के आठ अपनों को छीन लिया, दो पीढ़ियां हुईं खत्म

दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड ने कई परिवारों को गहरा जख्म दिया है। गुरुग्राम के अग्रवाल परिवार के आठ सदस्यों की मौत ने सभी को झकझोर दिया। शुरुआती जांच में सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी सामने आई है।

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Malviya Nagar Fire Tragedy :मालवीय नगर अग्निकांड दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में कुल 21 लोगों की जान चली गई, जिनमें 12 विदेशी और 9 भारतीय नागरिक शामिल हैं। लेकिन सबसे ज्यादा दुखद कहानी गुरुग्राम के अग्रवाल परिवार की है, जिसने एक ही घटना में अपने आठ सदस्यों को खो दिया।

इलाज के लिए दिल्ली आया था परिवार

अग्रवाल परिवार अपने बुजुर्ग सदस्य राधेश्याम अग्रवाल की देखभाल के लिए दिल्ली आया था। राधेश्याम का इलाज साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में चल रहा था। परिवार ने अस्पताल के पास रहने की सुविधा के लिए एक होटल में कमरा लिया था, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत अस्पताल पहुंचा जा सके।

एक ही परिवार के आठ लोगों की मौत

इस हादसे में 48 वर्षीय विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी तरजनी अग्रवाल और उनकी दोनों बेटियां जीविशा (एंजल) तथा वार्या (पर्ल) की मौत हो गई। इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्य झावेरी, अशोक अग्रवाल, कमला और प्रेमलता अग्रवाल भी आग की चपेट में आ गए। इस तरह परिवार की दो पीढ़ियां एक ही हादसे में खत्म हो गईं।

रिश्तेदार भी बन गए हादसे का शिकार

तरजनी अग्रवाल के मायके पक्ष के कुछ रिश्तेदार भी राधेश्याम अग्रवाल का हालचाल जानने दिल्ली आए थे। वे भी उसी होटल में ठहरे हुए थे। दुर्भाग्य से आग लगने के बाद वे भी बाहर नहीं निकल सके और उनकी जान चली गई। परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग को नहीं पता पूरी सच्चाई

सबसे भावुक पहलू यह है कि अस्पताल में भर्ती राधेश्याम अग्रवाल को शायद अभी तक यह पूरी जानकारी नहीं दी गई है कि उन्होंने अपनी पत्नी, बेटे, बहू, पोतियों और अन्य रिश्तेदारों को हमेशा के लिए खो दिया है। परिवार के लोग इस गहरे सदमे से अभी भी उबर नहीं पा रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

प्रारंभिक जांच में होटल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि इमारत में बाहर निकलने के पर्याप्त रास्ते नहीं थे। कुछ खिड़कियां बंद थीं और मुख्य प्रवेश द्वार सेंसर सिस्टम से संचालित होता था। इससे लोगों को बाहर निकलने में काफी परेशानी हुई।

नियमों से ज्यादा कमरे चलाने का आरोप

जांच में यह भी सामने आया है कि जिस होटल को केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति थी, वहां करीब 25 कमरे चलाए जा रहे थे। अधिकारियों को संदेह है कि क्षमता से अधिक लोगों के ठहरने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने हादसे को और गंभीर बना दिया। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर आग कैसे लगी और इस त्रासदी के लिए कौन जिम्मेदार है।

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