H1N1 Cases Rise: दिल्ली-NCR में बदलते मौसम के बीच Influenza A (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी चिंता बढ़ा रही है। NCDC के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1,777 H1N1 मामले सामने आ चुके हैं, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले ज्यादा हैं। इसके साथ ही ऊपरी श्वसन तंत्र से जुड़े लक्षणों के कारण जांच कराने वालों की संख्या भी बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव के दौरान वायरल और श्वसन संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। ऐसे में खासकर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
मामलों में बढ़ोतरी
विशेषज्ञों के मुताबिक H1N1 के बढ़ते मामलों के साथ इसकी जांच की मांग भी बढ़ी है। Dr Dang’s Lab के CEO अर्जुन डांग ने बताया कि उनकी लैब में हाल के हफ्तों में दर्जनों पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। डॉक्टरों के अनुसार लगातार खांसी, गले में खराश, बुखार, नाक बहना या शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर उन्हें सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि हर सर्दी-जुकाम H1N1 नहीं होता, लेकिन लक्षण ज्यादा समय तक बने रहें या बिगड़ने लगें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
लक्षण पहचानें
H1N1 संक्रमण में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान जैसे सामान्य फ्लू के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई लोगों में बीमारी हल्की रहती है और आराम के साथ सुधार हो जाता है, लेकिन हाई रिस्क मरीजों में संक्रमण गंभीर हो सकता है। सांस लेने में परेशानी, लगातार तेज बुखार, सीने में दर्द, भ्रम या अत्यधिक कमजोरी जैसे संकेत दिखें तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं लेना उचित नहीं है।
बचाव जरूरी
H1N1 जैसे श्वसन संक्रमण से बचाव के लिए रोजमर्रा की सावधानियां काफी महत्वपूर्ण हैं। नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना तथा भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के अनुसार मास्क पहनना संक्रमण का खतरा कम कर सकता है। अगर किसी व्यक्ति में फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उसे पर्याप्त आराम करना चाहिए और अनावश्यक रूप से दूसरे लोगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। इससे घर के बुजुर्गों, बच्चों और अन्य संवेदनशील लोगों तक संक्रमण पहुंचने की संभावना कम होगी।
पॉजिटिव होने पर
अगर जांच में H1N1 की पुष्टि होती है तो घबराने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज और आराम करना चाहिए। संक्रमित व्यक्ति को चिकित्सकीय सलाह के मुताबिक दूसरों से दूरी बनाए रखने की जरूरत हो सकती है, खासकर ऐसे घरों में जहां बुजुर्ग, छोटे बच्चे या कमजोर इम्यूनिटी वाले सदस्य हों। हाई रिस्क मरीजों को लक्षण शुरू होने पर ही चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि कुछ मामलों में समय पर उपचार बीमारी को गंभीर होने से रोकने में मदद कर सकता है। खुद से दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देना सबसे सुरक्षित तरीका है।



