Domestic Dispute Turns Fatal: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के मीरगंज इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां मामूली कहासुनी ने ऐसा खतरनाक रूप ले लिया कि एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि उसके पति ने खुद की जान ले ली। यह घटना घरेलू हिंसा की उस सच्चाई को सामने लाती है, जो अक्सर चारदीवारी के भीतर दबकर रह जाती है।
चुरई दलपतपुर गांव में रहने वाले रुस्तम अली (40) का शनिवार सुबह अपनी पत्नी रूबी से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच पहले से ही तनाव चल रहा था। कहासुनी इतनी बढ़ गई कि रुस्तम ने गुस्से में आकर छत पर बैठी रूबी को डंडे से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद उसने उसे छत से नीचे धक्का दे दिया। यहीं नहीं, उसने ऊपर से ईंटें भी फेंकीं, जिससे रूबी के सिर और शरीर में गंभीर चोटें आईं।
कुंदे से फंदा बना की आत्महत्या
महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी और घायल रूबी को गंभीर हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मीरगंज ले गए। हालत नाजुक होने के कारण डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
पत्नी को अस्पताल भेजे जाने के बाद रुस्तम ने खुद को घर के एक कमरे में बंद कर लिया। कुछ देर बाद उसने छत पर लगे कुंदे से फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली।पुलिस की मौजूदगी में ग्रामीणों ने दरवाजा तोड़ा और उसे बाहर निकाला। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं, इसलिए उसे भी सीएचसी ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पत्नी के परिवार का आरोप
रूबी के मायके वालों का आरोप है कि रुस्तम उसे आए दिन मारता-पीटता था और मायके से पैसे लाने का दबाव बनाता था। रूबी के भाई साजिद अली ने बताया कि रुस्तम कोई काम नहीं करता था और खर्च के लिए पत्नी पर निर्भर रहता था।
दो दिन पहले ही ससुराल आई
दो दिन पहले ही रूबी मायके से ससुराल गई थी।
स्थानीय सभासद सरफराज अली के अनुसार, रूबी के पिता साबिर अली काफी समय से बीमार हैं और पैरालाइसिस के चलते बिस्तर पर हैं। इसी कारण परिवार पहले से ही तनाव में था। वहीं, रुस्तम के पिता रेलवे से रिटायर्ड कर्मचारी हैं, जिन्होंने बेटे को अलग मकान बनाकर दिया था और खर्च के लिए पैसे भी देते थे।
पुलिस का बयान
पुलिस का कहना है कि उन्हें 112 नंबर पर मारपीट की सूचना मिली थी। मामले की जांच की जा रही है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि घरेलू विवाद और बेरोजगारी किस तरह परिवारों को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं।





