हिमाचल प्रदेश का कसोल देश-विदेश के पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। यहां स्थित फ्री कसोल कैफे को लेकर अतीत में भारतीयों के प्रवेश से जुड़ा विवाद सामने आया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक भारतीय महिला को कथित तौर पर मेन्यू देने से मना किया गया, जबकि उसके साथ मौजूद विदेशी व्यक्ति को सेवा दी गई। घटना के बाद कैफे की कथित विदेशी ग्राहकों को प्राथमिकता देने वाली नीति पर सवाल उठे थे। हालांकि, इस तरह की पुरानी रिपोर्टों को वर्तमान नियम मानने से पहले स्थानीय स्थिति की पुष्टि करना जरूरी है।
अहमदाबाद का कैफे
अहमदाबाद के साकुरा रयोकान को लेकर भी भारतीयों के प्रवेश से जुड़ी चर्चाएं सामने आई थीं। यह जापानी शैली का कैफे था और इसे लेकर ऐसी रिपोर्टें थीं कि यहां मुख्य रूप से जापानी ग्राहकों को प्राथमिकता दी जाती थी। विवाद के दौरान इसके पीछे जापानी ग्राहकों के लिए विशेष माहौल बनाए रखने की बात सामने आई। महिला स्टाफ के साथ कथित दुर्व्यवहार और घूरने जैसी शिकायतों का हवाला भी दिया गया था। हालांकि, ऐसी निजी संस्थानों की नीतियां समय के साथ बदल सकती हैं।
गोवा के बीच
गोवा अपने समुद्र तटों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। अतीत में कुछ समुद्र तटों को विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष तौर पर इस्तेमाल किए जाने की खबरें सामने आई थीं। भारतीयों के प्रवेश को लेकर भी विवाद हुआ था। ऐसी खबरों में विदेशी महिला पर्यटकों के साथ छेड़खानी और असहज व्यवहार को इसका कारण बताया गया था। हालांकि, इसे गोवा के सभी समुद्र तटों पर लागू नियम समझना गलत होगा। आज भी गोवा के अधिकांश लोकप्रिय बीच आम पर्यटकों के लिए खुले हैं।
चेन्नई का होटल
चेन्नई के रेड लॉलीपॉप इन का नाम भी भारतीयों के प्रवेश से जुड़े विवादों में सामने आता रहा है। पुरानी रिपोर्टों के अनुसार, होटल ने खुद को पहली बार भारत आने वाले विदेशी यात्रियों के लिए विशेष स्थान के तौर पर पेश किया था। इसी वजह से भारतीय मेहमानों के प्रवेश को लेकर सवाल उठे। हालांकि, किसी होटल की पुरानी नीति को मौजूदा नियम मानना सही नहीं है। यात्रा या ठहरने की योजना बनाने से पहले होटल की वर्तमान बुकिंग और प्रवेश नीति की पुष्टि करना बेहतर है।
ब्रॉडलैंड्स होटल
चेन्नई के ब्रॉडलैंड्स होटल को लेकर भी अतीत में विदेशी और भारतीय मेहमानों के लिए अलग व्यवहार की खबरें सामने आई थीं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि विदेशी पासपोर्ट रखने वाले यात्रियों को प्राथमिकता दी जाती थी और भारतीयों को कमरे देने से इनकार किया जाता था। हालांकि, होटल की ओर से ऐसी ‘नो इंडियन्स’ नीति के आरोपों को खारिज किए जाने की बात भी रिपोर्टों में कही गई। इसलिए इस मामले को स्थापित मौजूदा नियम के बजाय पुराने विवाद के रूप में देखना ज्यादा उचित है।
प्रतिबंध का सवाल
भारत में किसी व्यक्ति के भारतीय होने के आधार पर सार्वजनिक स्थान पर प्रवेश रोकना एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है। ऊपर बताए गए कई मामले पुराने मीडिया विवादों और रिपोर्टों पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें आज भी लागू प्रतिबंध मानना सही नहीं होगा। निजी होटल या कैफे अपनी सेवा नीति बना सकते हैं, लेकिन वह कानून से ऊपर नहीं होती। किसी खास जगह पर जाने से पहले उसकी मौजूदा प्रवेश नीति और स्थानीय नियमों की जांच करना सबसे सुरक्षित तरीका है।


