Mumbai Local Politics:कौन हैं अमरीन अब्राहानी जिसने गवली का क़िला ढहा कर बदला सियासी मिजाज, विरासत पर भारी पड़ा बदलाव

बीएमसी चुनाव 2026 में वार्ड 212 से अमरीन शहजाद अब्राहानी की जीत ने दिखाया कि बायकुला में अब लोग पुरानी विरासत नहीं, बल्कि काम और बदलाव को प्राथमिकता दे रहे हैं।

Amrin Shehzad Abrahani BMC Election

Who Is Amrin Shehzad Abrahani: मुंबई बीएमसी चुनाव 2026 में कई पुराने राजनीतिक किले ढहते दिखे। सबसे बड़ा झटका अरुण गवली उर्फ ‘डैडी’ के परिवार को लगा। गवली की दोनों बेटियां, गीता गवली और योगिता गवली, चुनाव हार गईं। बायकुला-अग्रीपाडा के वार्ड 212 से समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार अमरीन शहजाद अब्राहानी ने गीता गवली को हराकर बड़ा उलटफेर किया।

अमरीन शहजाद अब्राहानी समाजवादी पार्टी की उभरती हुई नेता हैं। वे खुद को एक मां, पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता बताती हैं। उनके पति का नाम शहजाद यूसुफ अब्राहानी है। अमरीन लंबे समय से स्थानीय मुद्दों पर काम करती रही हैं और लोगों के बीच उनकी पहचान एक जमीनी कार्यकर्ता की रही है।

सोशल मीडिया पर भी अमरीन सक्रिय हैं। इंस्टाग्राम पर उनका अकाउंट है, जहां वे स्वास्थ्य सुविधाओं, महिलाओं की समस्याओं, डिलीवरी और गिग वर्कर्स की परेशानियों जैसे मुद्दों को लगातार उठाती रही हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उनका साफ कहना था कि अब लोग नाम या विरासत नहीं, बल्कि काम देखना चाहते हैं।

वार्ड 212, यानी बायकुला-अग्रीपाडा इलाका, लंबे समय से गवली परिवार का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। गीता गवली तीन बार की पूर्व पार्षद रह चुकी थीं और 2017 में भी इसी वार्ड से जीती थीं। उनका प्रचार ‘डैडी की बेटियां’ और पुराने भरोसे पर टिका हुआ था। लेकिन इस बार हालात बदल चुके थे।

अमरीन ने अपने पूरे अभियान में स्थानीय मुद्दों पर जोर दिया। उन्होंने सरकारी अस्पतालों की हालत, प्राइवेट अस्पतालों की महंगाई, सफाई, पानी और कामकाजी युवाओं की दिक्कतों को सामने रखा। खास तौर पर मुस्लिम बहुल इलाकों में समाजवादी पार्टी का समर्थन उन्हें मजबूती देता दिखा।

वहीं, गवली परिवार का प्रभाव अब पहले जैसा नहीं रहा। अरुण गवली लंबे समय से जेल में हैं और उनकी राजनीतिक पकड़ धीरे-धीरे कमजोर होती गई। गीता गवली की घोषित संपत्ति और पुराने वादों पर भी मतदाताओं ने सवाल उठाए। लोगों को लगा कि अब इलाके को नए चेहरे और नए सोच की जरूरत है।

इस वार्ड में कांग्रेस, एमएनएस और अन्य दलों के उम्मीदवार भी मैदान में थे, लेकिन मुकाबला सीधे गीता गवली और अमरीन अब्राहानी के बीच सिमट गया। नतीजे में जीत अमरीन के खाते में गई और गवली परिवार को करारी हार का सामना करना पड़ा।

बीएमसी चुनाव 2026 ने साफ संदेश दिया है कि मुंबई की राजनीति में अब केवल पहचान या विरासत के सहारे जीत आसान नहीं है। लोग अपने आसपास के काम, सुविधाएं और भविष्य की योजनाएं देख रहे हैं। अमरीन शहजाद अब्राहानी की जीत इसी बदलाव की मिसाल बनकर सामने आई है।

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