Cyber Crime: दुनियाभर में साइबर हमलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने इस चुनौती को और भी गंभीर बना दिया है। हाल ही में Google ने खुलासा किया कि उसने एक बड़े साइबर हमले को समय रहते रोक दिया, जिसमें पहली बार AI की मदद से तैयार किया गया Zero-Day Exploit इस्तेमाल होने वाला था। अगर यह हमला सफल हो जाता, तो लाखों यूजर्स और संस्थाओं का संवेदनशील डेटा खतरे में पड़ सकता था।
Google को कैसे पता चला कि AI का इस्तेमाल हुआ?
Google का कहना है कि इस्तेमाल किए गए एक्सप्लॉइट में कई ऐसे संकेत मिले, जो आमतौर पर AI-Generated कोड में दिखाई देते हैं। उदाहरण के तौर पर कोड में बेहद डिटेल्ड टिप्पणियां, साफ-सुथरा स्ट्रक्चर और यहां तक कि एक गलत CVSS सिक्योरिटी स्कोर भी शामिल था, जिसे AI की “hallucination” माना जा रहा है।
चीन और उत्तर कोरिया के हैकर्स भी ले रहे AI का सहारा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि चीन और उत्तर कोरिया से जुड़े कई साइबर समूह अब तेजी से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये हैकर्स AI की मदद से कमजोरियां खोजने, एक्सप्लॉइट तैयार करने और ऑटोमेटेड टेस्टिंग जैसे काम कर रहे हैं।
Google ने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ हमलावर AI को ऐसे निर्देश दे रहे थे, मानो वह कोई अनुभवी नेटवर्क सिक्योरिटी एक्सपर्ट हो। इन प्रॉम्प्ट्स की मदद से राउटर फर्मवेयर और अन्य सिस्टम्स में Remote Code Execution जैसी गंभीर कमजोरियां खोजी जा रही थीं।
AI के बढ़ते खतरे ने बढ़ाई चिंता
Google का कहना है कि अब AI का इस्तेमाल केवल प्रयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि साइबर अपराधी इसे संगठित तरीके से बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने लगे हैं। यही वजह है कि टेक कंपनियां AI से जुड़े जोखिमों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गई हैं।
हाल ही में AI कंपनी Anthropic ने भी अपने नए “Mythos” मॉडल को सार्वजनिक करने में देरी की थी, क्योंकि कंपनी को डर था कि इसका गलत इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया जा सकता है।







