TECH ALERT: फोन बंद फिर भी Tracking? क्या Wi-Fi आपको पहचान रहा है? जानिए इसकी ताकत जान हैरान रह जाएंगे

फोन बंद करने से हर तरह की डिजिटल निगरानी खत्म नहीं होती। नई Wi-Fi रिसर्च दिखाती है कि रेडियो सिग्नल से आसपास मौजूद लोगों के पैटर्न पहचाने जा सकते हैं, जिससे प्राइवेसी को लेकर नई चिंता बढ़ी है।

WiFi Tracking Technology: क्या आपको लगता है कि फोन स्विच ऑफ करते ही आपकी डिजिटल पहचान पूरी तरह छिप जाती है? ऐसा जरूरी नहीं है। हालिया रिसर्च में सामने आया है कि सामान्य Wi-Fi सिग्नल का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान और उसकी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है। यानी कुछ मामलों में आपके पास फोन न होने पर भी वायरलेस नेटवर्क आपके आसपास मौजूद व्यक्ति के बारे में संकेत हासिल कर सकता है।

फोन की जरूरत नहीं

Karlsruhe Institute of Technology यानी KIT के शोधकर्ताओं ने ऐसी तकनीक पर काम किया है, जो सामान्य Wi-Fi राउटर से मिलने वाले सिग्नल के आधार पर लोगों को पहचानने की कोशिश करती है। खास बात यह है कि इसके लिए व्यक्ति के पास स्मार्टफोन या कोई दूसरा कनेक्टेड डिवाइस होना जरूरी नहीं है। रिसर्च में BFId नाम की तकनीक ने कमरे में मौजूद लोगों की पहचान बेहद ऊंची सटीकता से करने की क्षमता दिखाई।

सिग्नल कैसे पहचानता है

इसके पीछे Wi-Fi की रेडियो तरंगें काम करती हैं। जब ये तरंगें किसी व्यक्ति के शरीर से टकराकर आगे बढ़ती हैं तो उनके पैटर्न में मामूली बदलाव आते हैं। शोधकर्ताओं ने इन्हीं बदलावों से जुड़ी Beamforming Feedback Information यानी BFI का विश्लेषण किया। यह तरीका पहले इस्तेमाल होने वाली कुछ तकनीकों की तुलना में सामान्य Wi-Fi हार्डवेयर के साथ काम करने की क्षमता रखता है।

क्या फोन सच में ट्रैक होगा?

यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा। Wi-Fi आधारित यह तकनीक सीधे आपके बंद फोन की GPS लोकेशन नहीं निकालती। बल्कि आसपास मौजूद व्यक्ति की गतिविधियों और पहचान से जुड़े पैटर्न का अनुमान लगा सकती है। वहीं आधुनिक स्मार्टफोन में Find Hub जैसे फीचर बंद डिवाइस को भी खोजने में मदद कर सकते हैं, लेकिन यह डिवाइस और उसकी सेटिंग्स पर निर्भर करता है।

प्राइवेसी का खतरा

इस रिसर्च की सबसे बड़ी चिंता प्राइवेसी है। अगर सामान्य Wi-Fi इंफ्रास्ट्रक्चर से किसी व्यक्ति की पहचान या गतिविधियों के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है, तो भविष्य में इसका गलत इस्तेमाल निगरानी के लिए भी हो सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर Wi-Fi राउटर आपके फोन को लगातार ट्रैक कर रहा है। यह एक रिसर्च तकनीक है और इसके लिए विशेष विश्लेषण की जरूरत होती है।

बचाव कितना संभव

अपनी डिजिटल प्राइवेसी के लिए फोन में Location, Bluetooth और ऐप परमिशन की नियमित जांच करना उपयोगी है। Apple जैसे प्लेटफॉर्म Private Wi-Fi Address जैसी सुविधाएं देते हैं, जिनका उद्देश्य नेटवर्क के जरिए डिवाइस ट्रैकिंग को कम करना है। इसलिए फोन बंद करना अकेला प्राइवेसी समाधान नहीं माना जाना चाहिए।

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